अब जाम की होगी छुट्टी ! राजधानी में उड़ेंगी एयर टैक्सी, जाने सरकार का नया प्लान ?
Udaipur Times, New Delhi : राजधानी दिल्ली के भविष्य के विकास को लेकर तैयार किए गए दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में परिवहन व्यवस्था को लेकर कई बड़े बदलावों की तस्वीर सामने रखी गई है। पहली बार मास्टर प्लान में एयर टैक्सी और एयर पॉड जैसे भविष्य के परिवहन विकल्पों का भी उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली-NCR की कनेक्टिविटी, जेवर एयरपोर्ट से बेहतर संपर्क, नए परिवहन कॉरिडोर और आपात स्थिति में हवाई सेवाओं के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है।
हालांकि, एयर टैक्सी का मास्टर प्लान में शामिल होना यह नहीं दर्शाता कि दिल्ली में जल्द ही एयर टैक्सी सेवा शुरू होने जा रही है। फिलहाल योजना में इसे भविष्य की परिवहन व्यवस्था के एक संभावित विकल्प के तौर पर जगह दी गई है। इसके लिए अभी कोई निश्चित रूट, ऑपरेटर, उड़ान स्थल, लैंडिंग साइट या सेवा शुरू होने की तारीख तय नहीं की गई है।
पहली बार मास्टर प्लान में हुआ एयर टैक्सी का जिक्र
दिल्ली में बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते ट्रैफिक के बीच आने वाले वर्षों में परिवहन के नए विकल्पों की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान 2047 में पारंपरिक सड़क और मेट्रो नेटवर्क के साथ भविष्य की तकनीक आधारित परिवहन व्यवस्था को भी शामिल किया गया है।
इसमें एयर टैक्सी और एयर पॉड जैसे विकल्पों का उल्लेख किया गया है। एयर टैक्सी का उद्देश्य भविष्य में सड़क पर लगने वाले ट्रैफिक से अलग हवाई मार्ग के जरिए यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की संभावनाओं से जुड़ा है।
हालांकि, अभी यह शुरुआती योजना का हिस्सा है। इसे वास्तविक सेवा में बदलने के लिए आगे विस्तृत योजना, तकनीकी अध्ययन, सुरक्षा मानकों और विमानन नियामकों की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
अभी तय नहीं हुआ एयर टैक्सी का पूरा रूट
मास्टर प्लान में एयर टैक्सी का उल्लेख होने के बावजूद दिल्ली में इसके लिए अभी कोई निर्धारित रूट नहीं बनाया गया है। इसके अलावा यह भी तय नहीं है कि एयर टैक्सी कहां से उड़ान भरेगी और कहां उतरेगी।
किस कंपनी या ऑपरेटर को सेवा चलाने की अनुमति मिलेगी, इस संबंध में भी कोई घोषणा नहीं की गई है। इसी तरह सेवा शुरू होने की कोई निश्चित समयसीमा भी तय नहीं की गई है।
यानी फिलहाल इसे दिल्ली की लंबी अवधि की परिवहन योजना में भविष्य की संभावना के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।
जेवर एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी पर रहेगा खास जोर
मास्टर प्लान 2047 में दिल्ली को केवल शहर की सीमा तक सीमित रखने के बजाय पूरे NCR के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। खासतौर पर जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकास को देखते हुए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने की जरूरत पर ध्यान दिया गया है।
जेवर एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में दिल्ली और NCR के दूसरे हिस्सों से एयरपोर्ट तक तेज और सुगम संपर्क भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
एयरपोर्ट के साथ-साथ औद्योगिक कॉरिडोर और माल ढुलाई से जुड़े नेटवर्क के विस्तार से दिल्ली-NCR में लोगों और सामान की आवाजाही के तरीके में भी बदलाव आने की संभावना है।
गुरुग्राम, झज्जर और लोनी-बागपत क्षेत्र से कनेक्टिविटी
मास्टर प्लान में दिल्ली को NCR के प्रमुख क्षेत्रों से जोड़ने वाले रणनीतिक परिवहन कॉरिडोर को मजबूत करने की बात भी सामने आती है।
इसके तहत गुरुग्राम, झज्जर और लोनी-बागपत क्षेत्र की ओर दिल्ली की कनेक्टिविटी बेहतर करने पर जोर दिया गया है। इससे दिल्ली से बाहर निकलने और NCR के विभिन्न हिस्सों के बीच यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश होगी।
इन कॉरिडोर का उद्देश्य केवल यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाना नहीं है, बल्कि भविष्य में विकसित होने वाले नए आर्थिक, औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को भी बेहतर परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है।
एयर पॉड भी भविष्य के परिवहन का होगा हिस्सा
एयर टैक्सी के साथ एयर पॉड का उल्लेख भी मास्टर प्लान की खास बातों में शामिल है। एयर पॉड जैसी तकनीक को भविष्य की शहरी परिवहन व्यवस्था के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
बढ़ते ट्रैफिक, सीमित सड़क क्षमता और शहर में तेजी से बढ़ती परिवहन जरूरतों को देखते हुए भविष्य में ऐसे वैकल्पिक परिवहन माध्यमों की भूमिका बढ़ सकती है।
हालांकि, एयर पॉड के लिए भी अभी कोई निश्चित रूट, संचालन व्यवस्था या समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है
आपात स्थिति में अस्पतालों पर बन सकते हैं हेलिपैड
मास्टर प्लान में हवाई परिवहन की भूमिका केवल एयर टैक्सी तक सीमित नहीं रखी गई है। आपात स्थिति में हवाई सेवाओं के इस्तेमाल को भी ध्यान में रखा गया है।
नियमों और तकनीकी मानकों के अनुसार बड़े अस्पतालों और कुछ ऊंची इमारतों की छतों पर हेलिपैड विकसित किए जाने की संभावना रखी गई है। इनका इस्तेमाल सामान्य यात्री सेवा के बजाय मुख्य रूप से एयर एंबुलेंस, आपदा राहत और बचाव अभियान जैसे कार्यों में किया जा सकेगा।
ऐसी व्यवस्था आपात स्थिति में मरीजों को तेजी से अस्पताल पहुंचाने और किसी बड़े हादसे या प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को गति देने में मदद कर सकती है।
एयर टैक्सी और हेलिपैड की व्यवस्था अलग-अलग
यह समझना जरूरी है कि मास्टर प्लान में एयर टैक्सी और अस्पतालों पर हेलिपैड का प्रावधान दो अलग-अलग जरूरतों से जुड़ा है।
एयर टैक्सी भविष्य के शहरी परिवहन का संभावित विकल्प है, जबकि हेलिपैड की व्यवस्था मुख्य रूप से आपातकालीन सेवाओं और बचाव कार्यों के लिए उपयोगी होगी।
इसलिए अस्पतालों पर हेलिपैड के प्रावधान को एयर टैक्सी सेवा शुरू होने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
दिल्ली-NCR का परिवहन नेटवर्क होगा ज्यादा सुगम ओर एकीकृत
मास्टर प्लान 2047 का एक बड़ा उद्देश्य दिल्ली को आसपास के NCR क्षेत्रों से बेहतर तरीके से जोड़ना है। सड़क, मेट्रो, क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क, एयरपोर्ट और भविष्य की हवाई परिवहन तकनीकों को एक बड़े नेटवर्क के तौर पर विकसित करने की दिशा में योजना बनाई गई है।
जेवर एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर और नए शहरी क्षेत्रों के विकास के साथ दिल्ली-NCR में परिवहन की मांग भी बढ़ेगी। ऐसे में केवल मौजूदा सड़कों और सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहने के बजाय भविष्य के विकल्पों को अभी से मास्टर प्लान में जगह देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2047 तक परिवहन की बदल सकती है दिल्ली की तस्वीर
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में एयर टैक्सी और एयर पॉड का शामिल होना इस बात का संकेत है कि राजधानी की भविष्य की परिवहन योजना केवल मौजूदा साधनों तक सीमित नहीं रहने वाली है।
हालांकि, इन तकनीकों को जमीन पर उतारने में कई चुनौतियां होंगी। इनमें सुरक्षा, हवाई यातायात प्रबंधन, लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरणीय प्रभाव, लागत और नियामकीय मंजूरियां प्रमुख हैं।फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि दिल्ली के आधिकारिक दीर्घकालिक शहरी नियोजन में पहली बार शहरी हवाई परिवहन को जगह मिली है।
आने वाले वर्षों में तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और नियामकीय व्यवस्था तैयार होने के साथ यह तय होगा कि एयर टैक्सी और एयर पॉड वास्तव में दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक का कितना विकल्प बन पाते हैं।
