अब छाया में भी बनेगी पूरी बिजली ! नई सोलर सेल तकनीक से बढ़ेगी क्षमता, ऐसे करेगी काम

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अब छाया में भी बनेगी पूरी बिजली ! नई सोलर सेल तकनीक से बढ़ेगी क्षमता, ऐसे करेगी काम  

Udaipur Times, Solar Panels : सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। हॉन्गकॉन्ग पॉलीटेक्निक यूनिवर्सिटी (PolyU) के शोधकर्ताओं ने एक नया पेरोव्स्काइट-ऑर्गेनिक टैंडम सोलर सेल विकसित किया है, जो छाया पड़ने पर भी बेहतरीन प्रदर्शन करने में सक्षम है। यह तकनीक भविष्य में सोलर पैनलों की दक्षता और टिकाऊपन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

छाया में क्यों खराब हो जाते हैं सोलर पैनल?

आमतौर पर सोलर पैनल ऐसी जगह लगाए जाते हैं, जहां पेड़, इमारत या बादलों की छाया न पड़े। छाया पड़ने पर पैनलों में रिवर्स बायस स्ट्रेस (नेगेटिव वोल्टेज) उत्पन्न होता है, जिससे पतली-फिल्म (Thin-Film) सोलर सेल्स धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह समस्या सोलर सेल की बिजली बनाने वाली परत में मौजूद डीप ट्रैप स्टेट्स के कारण होती है, जो विद्युत आवेश (चार्ज) को फंसा देते हैं और पैनल की कुल क्षमता कम हो जाती है।

नई तकनीक की खासियत

वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नए सोलर सेल्स में इस कमी को दूर किया गया है। यह तकनीक छाया पड़ने पर बनने वाले नेगेटिव चार्ज को नियंत्रित करती है, जिससे पैनल को नुकसान नहीं पहुंचता। रिसर्च के दौरान यह सोलर सेल माइनस 40 वोल्ट के तनाव के बाद भी 90% से अधिक क्षमता बनाए रखने में सफल रहा। 

माइनस 20 वोल्ट पर 12 घंटे तक परीक्षण के बाद भी 90% दक्षता बरकरार रही। माइनस 4.5 वोल्ट पर करीब 2,000 घंटे (83 दिन) तक परीक्षण के बाद भी 97% क्षमता बनी रही।

क्या होगा फायदा?

यह नई तकनीक सोलर ऊर्जा उत्पादन को अधिक भरोसेमंद और प्रभावी बना सकती है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इससे सोलर सेल्स की बिजली उत्पादन क्षमता 26% से अधिक तक पहुंच सकती है। साथ ही, छाया और नेगेटिव वोल्टेज से होने वाले नुकसान में भी काफी कमी आएगी।

शोध दल के प्रोफेसर ली गैंग के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में ग्रीन एनर्जी को और अधिक मजबूत बनाने में मदद करेगी।

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