अब जमीन खरीदते वक्त नहीं होगा फ्रॉड ! एक क्लिक में ऐसे मिलेगी हर प्रॉपर्टी की जानकारी

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अब जमीन खरीदते वक्त नहीं होगा फ्रॉड ! एक क्लिक में ऐसे मिलेगी हर प्रॉपर्टी की जानकारी  

Udaipur Times, Digital ways to avoid property fraud : देश में तेजी से बढ़ रहे रियल एस्टेट बाजार के बीच जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और विवादों को रोकने के लिए अब तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। KPMG और FICCI की एक रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल तकनीक की मदद से जमीन की खरीद-बिक्री को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा रहा है। इससे एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने जैसी धोखाधड़ी पर काफी हद तक रोक लग सकती है।

जमीन को मिल रही यूनिक डिजिटल पहचान

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तहत अब जमीन के प्रत्येक टुकड़े को एक यूनिक डिजिटल पहचान दी जा रही है। यह व्यवस्था जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित और सत्यापित करने में मदद करती है।

घर बैठे कर सकेंगे सत्यापन

देशभर में करोड़ों भूमि पार्सल को जियो-रेफरेंस्ड यूनिक नंबर दिए जा चुके हैं। इससे खरीदार घर बैठे किसी भी संपत्ति का सत्यापन कर सकते हैं। साथ ही जमीन की वास्तविक स्थिति, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

क्या है ULPIN सिस्टम?

हर जमीन के टुकड़े को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) दिया जा रहा है। यह 14 अंकों का एक विशेष नंबर होता है, जो उस जमीन की डिजिटल पहचान के रूप में काम करता है। इसे जियो-रेफरेंसिंग, GPS तकनीक और हवाई सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया जाता है।

QR कोड से होगी जांच

डिजिटल रिकॉर्ड में यूनिक वेरिफिकेशन आईडी और QR कोड भी शामिल किए जा रहे हैं। इन QR कोड को स्कैन कर जमीन के रिकॉर्ड की सत्यता की जांच की जा सकती है। सभी रिकॉर्ड आधिकारिक डिजिटल पोर्टल और निर्धारित सर्वे सिस्टम के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं।

36 करोड़ से ज्यादा जमीनों को मिला ULPIN

KPMG और FICCI की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से अधिक भूमि पार्सल को जियो-रेफरेंस्ड ULPIN आवंटित किया जा चुका है। इस प्रणाली से फर्जी दस्तावेजों और डुप्लीकेट लेनदेन की संभावना काफी कम हो जाती है।

खरीदारों को होगा बड़ा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और ULPIN प्रणाली से प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। खरीदारों को जमीन खरीदने से पहले सही जानकारी मिलेगी और विवादों की संभावना भी कम होगी। आने वाले समय में यह प्रणाली रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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