दो बच्चों की मां बनने पर लोगों ने कहा छोड़ दो UPSC के सपने, विदेश की नौकरी छोड़ बुशरा बनी IPS अफसर

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दो बच्चों की मां बनने पर लोगों ने कहा छोड़ दो UPSC के सपने, विदेश की नौकरी छोड़ बुशरा बनी IPS अफसर 

UPSC Success Story, IPS Bushara Bano: लोगों ने कहा कि दो बच्चों की मां बनने के बाद अब बड़े सपने देखना छोड़ देना चाहिए, लेकिन बुशरा बानो ने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। सऊदी अरब की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर परिवार के साथ भारत लौटीं और बच्चों की जिम्मेदारी के बीच UPSC की तैयारी शुरू की। पहली कोशिश में 277वीं रैंक हासिल की, लेकिन सपना IPS बनने का था। इसलिए उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 234वीं रैंक हासिल कर पश्चिम बंगाल कैडर की IPS अधिकारी बन गईं। आज वही बुशरा बानो खड़गपुर में एडिशनल एसपी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

कन्नौज से शुरू हुआ सफर, पढ़ाई में आगे रहीं बुशरा

बुशरा बानो उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली हैं। पढ़ाई के मामले में भी उनका सफर काफी मजबूत रहा है। उनके पास PhD, MBA और MA जैसी डिग्रियां हैं। इसके अलावा उन्होंने NET-JRF भी हासिल किया है। उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन बताती है कि पढ़ाई उनके जीवन का अहम हिस्सा रही है। आगे चलकर यही शिक्षा उन्हें विदेश में अकादमिक करियर तक लेकर गई और फिर UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी में भी काम आई। बुशरा ने अपने करियर में अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव हासिल किया। पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि और लगातार आगे बढ़ने की इच्छा ने उन्हें अकादमिक क्षेत्र में करियर बनाने का मौका दिया। हालांकि, उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना लगातार बना रहा।

दो बच्चों की मां बनने पर लोगों ने कहा छोड़ दो UPSC के सपने

सऊदी अरब में असिस्टेंट प्रोफेसर छोड़ी नौकरी

बुशरा बानो ने सऊदी अरब की एक नामी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नौकरी की। उनके पास विदेश में अच्छी नौकरी थी और परिवार के साथ एक सेटल लाइफ भी थी। उनके दो छोटे बच्चे भी थे। ऐसे में बाहर से देखने पर उनकी जिंदगी काफी व्यवस्थित नजर आती थी, लेकिन बुशरा के मन में UPSC सिविल सेवा में जाने का सपना था। उन्होंने अपनी नौकरी और आरामदायक जिंदगी को अंतिम मंजिल नहीं माना। उनके लिए अभी एक और लक्ष्य बाकी था। विदेश में अच्छी नौकरी होने के बावजूद उन्होंने अपने इस सपने को गंभीरता से लिया और आगे चलकर इसके लिए अपनी पूरी जिंदगी की दिशा बदलने का फैसला किया।

पति ने भी छोड़ी सऊदी की नौकरी

बुशरा बानो की कहानी में उनके पति की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। उनके सपने को पूरा करने के लिए उनके पति भी मजबूती से उनके साथ खड़े रहे। साल 2016 में उनके पति ने भी सऊदी अरब की नौकरी छोड़ दी और दोनों भारत लौट आए। बुशरा के लिए UPSC की तैयारी सिर्फ नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं था। इसके साथ परिवार और जीवन की दिशा को भी बदलने का फैसला जुड़ा हुआ था। विदेश की नौकरी, बच्चों की जिम्मेदारी और सेटल लाइफ छोड़कर भारत लौटना आसान फैसला नहीं था, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।

दो बच्चों की मां बनने पर लोगों ने कहा छोड़ दो UPSC के सपने

लोगों ने कहा- अब पढ़ाई कैसे होगी?

बुशरा बानो के UPSC सफर का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर साल 2018 में आया। उस समय वह दूसरी बार मां बनने वाली थीं। परिवार और आसपास के लोगों को लगा कि अब बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उनके लिए पढ़ाई करना मुश्किल होगा। ऐसे समय में उन्हें तरह-तरह की बातें सुननी पड़ीं। समाज में अक्सर यह धारणा देखने को मिलती है कि दो बच्चों की मां बनने के बाद किसी महिला के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना बहुत मुश्किल हो जाता है। UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास करना तो और भी कठिन माना जाता है। लेकिन बुशरा ने इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी। बच्चों की देखभाल और परीक्षा की तैयारी के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। यही दृढ़ता आगे चलकर उनकी सफलता की वजह बनी।

पहली बार में मिली 277वीं रैंक

बुशरा की मेहनत का नतीजा UPSC सिविल सेवा परीक्षा में देखने को मिला। उन्होंने ऑल इंडिया 277वीं रैंक हासिल की। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी और उनकी मेहनत को साबित करने वाली सफलता भी थी। पहली सफलता के बाद उन्हें भारतीय रेल यातायात सेवा कैडर अलॉट हुआ। हालांकि, बुशरा के मन में इससे भी बड़ा लक्ष्य था। उनका सपना भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS में जाने का था। इसलिए पहली सफलता मिलने के बाद उन्होंने रुकने के बजाय दोबारा UPSC की तैयारी करने का फैसला किया। उनके लिए पहली रैंक और मिली हुई सेवा अंतिम मंजिल नहीं थी। वह अपने उस लक्ष्य को हासिल करना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने यह पूरा सफर शुरू किया था।

दूसरी कोशिश में 234वीं रैंक और बन गईं IPS

बुशरा बानो ने अपने सपने को पूरा करने के लिए फिर से UPSC की परीक्षा दी। इस बार उनकी मेहनत का नतीजा और बेहतर रहा। उन्होंने 234वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की और इसके साथ उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर में IPS मिला।
इस तरह पहली कोशिश में 277वीं रैंक और भारतीय रेल यातायात सेवा कैडर मिलने के बाद भी उन्होंने अपने मन का लक्ष्य नहीं छोड़ा। दूसरी कोशिश में 234वीं रैंक हासिल करके उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में जगह बना ली। उनकी कहानी का यह हिस्सा खास है, क्योंकि पहली सफलता के बाद भी उन्होंने यह नहीं माना कि अब मंजिल मिल गई है। उन्होंने वही किया जो वह शुरू से चाहती थीं और दूसरी कोशिश में अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने में सफल रहीं।

यूपी सरकार में SDM भी रह चुकी हैं बुशरा

IPS बनने से पहले बुशरा बानो प्रशासनिक सेवा में भी काम कर चुकी हैं। वह उत्तर प्रदेश सरकार में SDM के पद पर भी रह चुकी हैं। इस दौरान उन्हें प्रशासनिक कामकाज और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को करीब से समझने का मौका मिला। SDM के रूप में काम करने का अनुभव आगे उनके लिए काफी उपयोगी रहा। प्रशासनिक जिम्मेदारियों को समझने के बाद उनका सफर पुलिस सेवा की ओर बढ़ा और वह पश्चिम बंगाल कैडर की IPS अधिकारी बनीं।

2021 बैच की IPS, अब खड़गपुर में एडिशनल एसपी

बुशरा बानो पश्चिम बंगाल कैडर की 2021 बैच की IPS अधिकारी हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग खड़गपुर में एडिशनल एसपी के पद पर है। पुलिस सेवा में आने के बाद वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। हाल ही में बुशरा बानो ने खड़गपुर में आयोजित राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। उन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत की और सोशल मीडिया पर कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं। इससे यह भी सामने आता है कि पुलिस सेवा की जिम्मेदारियों के साथ वह सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों में भी भागीदारी करती हैं।

बुशरा की कहानी सिर्फ UPSC पास करने की कहानी नहीं

बुशरा बानो की कहानी को सिर्फ UPSC पास करने की कहानी तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। यह उस सोच को चुनौती देने वाली कहानी भी है, जिसमें महिलाओं के लिए शादी और मातृत्व के बाद बड़े सपनों की राह मुश्किल मान ली जाती है।

उनके सामने विदेश की नौकरी थी, परिवार था और दो बच्चों की जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को छोड़ा नहीं। 2018 में दूसरी बार मां बनने की स्थिति में भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और UPSC की तैयारी को आगे बढ़ाया। पहली बार UPSC में 277वीं रैंक हासिल की, लेकिन मनचाहा IPS कैडर नहीं मिला तो दूसरी बार परीक्षा दी। 

इस बार 234वीं रैंक के साथ पश्चिम बंगाल कैडर की IPS अधिकारी बनीं। कन्नौज से निकली वही बुशरा बानो आज खड़गपुर में एडिशनल एसपी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि जिंदगी में जिम्मेदारियां बढ़ने का मतलब यह नहीं कि सपने छोटे करने पड़ेंगे। सही सहयोग, लगातार मेहनत और अपने लक्ष्य पर भरोसा हो तो रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो, मंजिल तक पहुंचने की कोशिश जारी रखी जा सकती है।

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