शादी के अगले ही दिन मैदान में, कोरोना में भी नहीं छोड़ी प्रैक्टिस, अब कॉमनवेल्थ में जीता कांस्य पदक
Udaipur Times, Success Story : दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर मेहनत की मिसाल बनी चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू), भिवानी के शारीरिक शिक्षा विभाग की पीएचडी शोधार्थी सीमा कालीरामन ने ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत, हरियाणा और विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। सीमा ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 58.65 मीटर का थ्रो कर तीसरा स्थान हासिल किया।
उनकी इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने खेल नीति के तहत एक लाख रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। चरखी गांव की बेटी और दिनोद गांव की बहू सीमा वर्तमान में सीबीएलयू से पीएचडी कर रही हैं। उनका अगला लक्ष्य एशिया कप में पदक जीतना और अंतिम सपना ओलंपिक में देश के लिए पदक हासिल करना है।
व्यक्तिगत जीवन और संघर्ष
सीमा की सफलता केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्षों के संघर्ष, अनुशासन और अटूट समर्पण की कहानी है। बेहद कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत बॉक्सिंग से की थी। बाद में अपनी क्षमता को पहचानते हुए उन्होंने डिस्कस थ्रो को चुना और यही फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। आज उसी खेल में उन्होंने विश्व मंच पर तिरंगा लहराया है।
उनकी संघर्षगाथा हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है। वर्ष 2019 में विवाह के अगले ही दिन, जब घर पर रिश्तेदार नवविवाहिन जोड़े को आशीर्वाद देने पहुंच रहे थे, तब सीमा स्टेडियम में अभ्यास कर रही थीं। उनके हर दिन की प्रैक्टिस अपने सपने के उतनी ही करीब पहुंचने का माध्यम थी। कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने एक दिन का अभ्यास नहीं छोड़ा। मैदान बंद होने पर घर और आसपास उपलब्ध संसाधनों के सहारे फिटनेस, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और तकनीकी अभ्यास जारी रखा।
मातृत्व की जिम्मेदारी भी साथ निभाई
विवाह के बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ी और बाद में वह एक बेटे की मां भी बनीं, लेकिन खेल के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ। परिवार, मातृत्व, पीएचडी की पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य पर पूरा फोकस बनाए रखा। इस सफर में उनके पति रविंद्र ने जीवनसाथी के साथ-साथ कोच की भूमिका निभाई।
सीएम सैनी सहित अन्य ने दी बधाई
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सीमा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पर पूरे हरियाणा और देश को गर्व है। वहीं, सीबीएलयू की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने सीमा को बधाई देते हुए कहा कि एक शोधार्थी का विश्व स्तर पर भारत के लिए पदक जीतना पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सीमा भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। उधर, दिनोद गांव में उनके ससुराल और चरखी में परिजनों व ग्रामीणों ने लड्डू बांटकर खुशी मनाई। पति एवं कोच रविंद्र ने कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की कठिन मेहनत और अनुशासित तैयारी का परिणाम है।
पिता बोले-अब ओलंपिक में रचेगी इतिहास
ग्लासगो में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली चरखी दादरी के गांव चरखी की बेटी सीमा सांगवान की सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। पदक जीतने की खबर मिलते ही गांव चरखी और सीमा के ससुराल में दीपावली जैसा माहौल बन गया। परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई तथा पटाखे फोड़कर बेटी की उपलब्धि का जश्न मनाया।
विधायक सुनील सांगवान ने सीमा के पिता ओमप्रकाश उर्फ सते सांगवान को फोन कर बेटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सीमा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर जिले, प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है।
सीमा के पिता ओमप्रकाश सांगवान ने कहा कि उनकी बेटी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में तिरंगा फहराकर देश का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सीमा आगामी ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई करेगी और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचेगी। बेटी की सफलता पर मां कैलाश देवी की आंखें खुशी से नम हो गई। भाई जतिन और नवीन सांगवान ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बहन की यह उपलब्धि पूरे गांव के लिए गौरव का क्षण है।
