घरेलू हिंसा एवं महिला सशक्तीकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला
महिलाओं र्का आिर्थक आत्मनिर्भर बनने के लिए विभिन्न प्रकार के महिलाओं की स्वावलम्बन बनने योजनाओं के बारे मे बताया कि घर पर रह कर छोटे कार्य कर के महिला अपना तथा समाज का आर्थिक विकास कर सकती है।

महिलाओं र्का आिर्थक आत्मनिर्भर बनने के लिए विभिन्न प्रकार के महिलाओं की स्वावलम्बन बनने योजनाओं के बारे मे बताया कि घर पर रह कर छोटे कार्य कर के महिला अपना तथा समाज का आर्थिक विकास कर सकती है।
आज कुछ महिलाऐं घर की दहलिज से निकल कर बाहर क्षेत्र में कार्यरत भी है किन्तु फिर भी वे सही अर्थो में स्वावलम्बी नहीं है वे अभी भी पुरूष प्रधान समाज की कठपुतली मात्र है। किसी भी क्षेत्र का निर्णय स्ंवय नहीं ले सकती ,चाहे वह मामला घर का हो चाहे व्यवसाय का। कहना न होगा कि वह असुरक्षित भी है – शारीरिक,सामाजिक,मनौवैज्ञानिक आर्थिक सभी दृष्टि से इसके लिए वह फिर पुरूष पर ही निर्भर है।
ये विचार सोमवार को जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संघटक महिला अध्ययन विभाग एंव केन्द्रिय श्रम एंव रोजगार मंत्रालय – नई दिल्ली के सयूंक्त तत्वावधान में आयोजित खरपीणा सामुदायिक केन्द्र पर घरेलू हिंसा एवं मजिला सशक्तिकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य वक्ता डा. सुमन पामेचा ने अपने उद्बोधन में कहा।
मुख्य अतिथि डॅा.नीलम कोैषिक ने महिलाओं को बताया कि ग्रामीण स्तर पर बालिका शिक्षा को बढावा देने से न सिर्फ सरकारी / गैर सरकारी प्रयासों की आवष्यकता है , बल्कि समाज की ईकाई समुदाय को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी । बालिकाओं के शिक्षण के लिए उनके अभिभावको को समारात्मक सोच को पर होने वाले घरेलु हिंसा के बारे में महिलाओं को शिक्षा के अभाव में इसका सामना करना पडता है।
विशिष्ठ अतिथि डॉ. एस के मिश्रा ने कहा कि यह समय की सामाजिक विउम्बना ही मानी जायेगी कि विकास की राह में कन्या भ्रुण हत्या जैसा घृणित कार्य अवरोधक बना हुआ है ।
जागरूकता के अभाव में यह विसगंति भारतीय समाज में तेजी से बढी है जिससे स्त्री- पुरूष के लिंगानुपात में जबरदस्त अंतर आया है । इस स्थिति से निपटने के लिए समय रहते ठोस कदम नही उठाये गये तो आने वाले समय मं परीणा ऐसे भयावह होंगें कि उसकी कन्पना भी सिहरन पैदा कर देगी।
अध्यक्षता करते हुए महिला अध्ययन विभाग की निदेषक डॉ. मन्जु माण्डोत ने सभी महिला प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा एक दिवसीय कार्यशाला के महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एंव बाल अधिकारश् विषय पर अपने उद्बोधन में कहा कि महिलाओं को देश के आर्थिक व सामाजिक विकास में महिलाओं के योगदान को नकारा नही जा सकता , भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति का स्थान उच्च रहा है ।
महिमामयी नारी के त्याग, बलिदान,शक्ति,षौर्य , समर्पण, सतीत्व, एकनिष्ष्ठ विष्वास, उदभूत कौषल के कई आदर्श प्रस्तुत किये है । यह सही है कि हमारा देश गांवों में बसता है और देश की अधिकाश जनसंख्या गावों में निवास करती है । वे गांव जो आज भी शिक्षा की ज्योति से अछूते है , वहॉ महिला सशक्तिकरण की स्थिति कमजोर है।
रूढिवादिता और सामाजिक कुरीतियों ने महिलाओं के पैरों में बैडियां डाल रखी है। इस अवसर पर चितरंजन नागदा, हिरालाल चौबीसा, मधु पालीवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह का संचालन मधु पालीवाल ने किया। धन्यवाद देवीलाल गर्ग ने दिया।
