राजस्थान की प्रमुख फसलों की आगत लागत पर एक दिवसीय कार्यषाला
महाराणा प्रताप कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विष्वविद्यालय के कृषि अनुस

महाराणा प्रताप कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विष्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान के सभागार में एक दिवसीय आगत लागत पर चर्चा के दौरान मुख्य अतिथी श्री सुनील जैन, उप महानिदेषक केन्द्रीय सॉख्यिकी कार्यालय, सॉाख्यिकी एवम् कार्यक््रम कियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार दिल्ली ने जिलेवार सफल घरेलु उत्पाद की गणना को आवष्यक बताया।
इस हेतु जिले में बोई जाने वाली सभी प्रमुख फसलों की आगत लागत का आकलन आवष्यक है। काष्त लागत अघ्ययन आयोजना में सम्मिलित 12 फसलों के अलावा प्रदेष के विभिन्न जिलों की 18 अन्य मुख्य फसलों की आर्थिकी का अध्ययन आवष्यक बताया एवम् जिलेवार सकल घरेलू उत्पाद (ळक्च्) की गणना करने पर प्रकाष डाला।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डा.जी.एस. आमेटा निदेषक अनुसंधान ने आगत लागत के आंकडों में विरोधाभास पर चिन्ता व्यक्त की तथा बासवाडा में रबी मक्का, चितौडगढ में अफीम एवम् उदयपुर संभाग में उड़द के खेती का अध्ययन की आवष्यकता बतायी । श्री संकरषन साहू, निदेषक, केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय, नई दिल्ली ने काष्त लागत अघ्ययन के आंकडों को भी इस अघ्ययन में षामिल करने का सुझाव दिया।
श्री ओम प्रकाष बैरवा, निदेषक एवं संयुक्त सचिव, कृषि एवं सांख्यिकी निदेषक, जयपुर ने सकल घरेलू उत्पाद की गणना में आवष्यक सभी धटकों के अध्ययन में सहयोग करने की बात कही। श्री एस.एस.बुरड़क, विभागाघ्यक्ष एवं काष्त लागत परियोजना प्रभारी ने जिलेवार इनपुट कोस्ट की गणना के लिए एक पावर पाइन्ट प्रजन्टेषन दिया।
इस कार्यषाला में डा.एस.के ष्षर्मा, संयुक्त निदेशक,मप्रकप्रौृविवि, श्री आर के पाण्डेय, संयुक्त निदेषक सांख्यिकी, श्री सुधीर दव,े सह निदेशक, श्री अरविन्दकुमार, रेवन्यू बोर्ड अजमेर, डा.लतिका षर्मा , क्षे़त्राधिकारी आदि उपस्थित थे।
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