दिल के चेम्बर्स को उल्टा करने का ऑपरेशन फिर से सफल
गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कार्डियक विभाग के डॉ संजय गाँधी द्वारा डेढ़ साल की मासूम के हृदय की नसों व मस्तिष्क रक्तस्त्राव का सफल ऑपरेशन कर जान बचाई।
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गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कार्डियक विभाग के डॉ संजय गाँधी द्वारा डेढ़ साल की मासूम के हृदय की नसों व मस्तिष्क रक्तस्त्राव का सफल ऑपरेशन कर जान बचाई।
हृदय शल्य चिकित्सक डॉ संजय गाँधी ने बताया कि डेढ़ साल की बच्ची जिसको जन्मजात हृदय की बीमारी थी, उसके मां बाप इससे काफी परेशान थे। उन्होंने इस बीमारी के निदान के लिए जगह जगह परामर्श किया और जोधपुर, बैंगलोर कई सारे चिकित्सकों को दिखाया। तो उन्हें बताया गया कि यह बीमारी लाइलाज है।
लेकिन बैंगलोर में उसे ऑपरेशन के लिए बार बार पोस्टपोर्न करते गए जिससे अभिभावक बहुत परेशानी में थे। चूंकि बच्ची के मामाजी उदयपुर में रहते हैं, तो उन्होंने इनको यहां आने की सलाह दी। तो मां बाप ने बच्चे को यहां दिखाया, तो बच्चे की सारी जांचे फिर से की गई और पाया गया कि उसकी दिल से निकलने वाली प्रमुख नाडियां उल्टी जुड़ी हुई है। गीतांजली हृदय विभाग के हृदय शल्य चिकित्सक डॉ संजय गाँधी ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी और बताया कि ऐसा एक बच्चा जोधपुर से यहां पर पहले ऑपरेशन करवा चुका है और वह पूर्णतया स्वस्थ है।
बच्चे के मां बाप को ऑपरेशन की जटिलता के बारे में विस्तारपूर्वक बताने के बाद ऑपरेशन की तैयारी की गई जिसमें गीतांजली के हृदय शल्य चिकित्सा की टीम डॉ संजय गाँधी, डॉ अंकुर गाँधी, डॉ मनमोहन शामिल थे। उन्होंने 6 घंटे चले इस ऑपरेशन में दिल के चार में से दो कमरों को उल्टा कर दिया और बच्ची का रक्तसंचार सुचारू रूप से शुरू हो गया। ऑपरेशन के बाद बच्ची को आईसीयू में रखा गया, उसे लंबे समय तक वेंटिलेटर की जरूरत भी रही और बच्ची को आखिरकार स्वस्थ कर डिस्चार्ज कर दिया गया।
गीतांजली में यह इस तरह का दुसरा केस सामने आया है जिसका सफलतापूर्वक ऑपरेशन हुआ और बच्ची के मां बाप जिन्होंने बैंगलोर से यहां आकर यह ऑपरेशन करवाया, वे बहुत खुश है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत जटिल व असामान्य बीमारी है। और इस बीमारी का ऑपरेशन पूरे देश में चार पांच जगह ही होता है जिसमें गीतांजली भी अपना नाम दर्ज करवा चुका है।
मैसोर निवासी डेढ़ वर्षीय रोगी गुंजन की मां ने दर्द बताया कि वह हमेशा रोती रहती थी, इस बात से वे काफी परेशान थे। लेकिन अपने परिजन के कहने पर वे गीतांजली हॉस्पिटल आई जहां डॉ संजय गाँधी द्वारा ऑपरेशन के बाद बच्ची ने राहत की सांस ली। उन्हांेने यह भी कहा कि जहां बाहर कई ओर अस्पतालों में खर्च ज़्यादा था, वहीं गीतांजली हॉस्पिटल में खर्च भी आधा ही लगा।
