#CAA, #NPR और #NRC को समझने के लिए संगोष्ठी का आयोजन
उदयपुर । CAA, NPR और NRC को समझने एवं इसकी बारीकियों और दुष्प्रभावों को समझने के लिए शनिवार की शाम बोहरवाड़ी स्थित कम्युनिटी हॉल में बोहरा यूथ संस्थान, दाऊदी बोहरा जमात, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ दाऊदी कम्युनिटी, समता संवाद, जन तांत्रिक विचार मंच और ऑल इंडिया पीपल्स फोरम के संयुक्त तत्वावधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी का आगाज़ करते हुए प्रोफेसर हेमेंद्र चंडालिया ने CAA/NRC को सरकार का विभाजनकारी एजेंडा बताते हुए कहा की सरकरी तंत्र द्वारा जो भ्रम फैलाया जा रहा है उनमे मीडिया का खास वर्ग भी शामिल है लेकिन ख़ुशी की बात है की प्रतिरोध की आवाज़ भी बुलंद हो रही है। उन्होंने कहा की NRC से सबसे अधिक कोई प्रभावित होगा तो वह गरीब तबका होगा ,जिनके पास न रहने को मकान है न कोई ठिकाना।
वक्ता शंकर लाल चौधरी ने कहा की CAA/NRC देश के धर्मनिरपेक्ष और जनतांत्रिक स्वरूप और समतावाद पर सीधा सीधा प्रहार है। कुछ ताकते देश को सम्प्रदायवाद में झोंक कर एक वर्ग को पूरी तरह आइसोलेटेड करना चाहती है। लेकिन देश के धर्मनिरपेक्ष लोग इसे सफल नहीं होने देंगे।
संगोष्ठी में सीनियर अधिवक्ता डॉ अरुण व्यास ने कहा की NRC के मुद्दे पर सरकार खुद भ्रम फैला रही है। एक तरफ राष्ट्रपति के अभिभाषण में संसद में देश के गृहमंत्री NRC लागू करने के बात करते है तो वहीँ दूसरी तरफ प्रधानमंत्री रामलीला मैदान में इसे नकारते है। उन्होंने कहा की JNU में दीपिका पादुकोण के जाते ही कुछ लोग उन्हें देशद्रोही घोषित करने लगते है बस हर हाल में वह विरोध के स्वर को दबाना चाहते है।
वहीँ अर्जुन देथा ने कहा की आर्थिक मुद्दों और बेरोज़गारी को दूर करने के अपने वादों में विफल सरकार जनता को असली मुद्दों से भटकाने के लिए बिला वजह
देश को लाइन में लगाना चाहती है, पहले नोटबंदी के लिए लाइन में लगाया, फिर जीएसटी लागू कर व्यापारियों को लाइन में लगाया, बेरोज़गारो और युवाओ को भटकने पर मजबूर किया और अब NRC लागू कर लोगो को लाइन में लगाने का कार्य कर रही है।
प्रोफेसर आर एल व्यास ने बताया की सरकार का ही उद्देश्य है येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहना, चाहे उसके लिए देश को धर्म के आधार पर बांटना ही क्यों न पड़े। सरकार एक पक्ष को भयभीत रख दूसरे पक्ष को खुशफहमी में रख सबको बरगलाना चाहती है। सरकार की इस मंशा के खिलाफ सभी वंचित वर्गों को एक मंच पर आना होगा।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ दाऊदी बोहरा कम्युनिटी सेंटर के चेयरपर्सन कमांडर मंसूर अली बोहरा ने कहा की देश के अल्पसंख्यको के हितो की लड़ाई, अल्पसंख्यक वर्ग नहीं लड़ता बल्कि देश के बहुसंख्यक वर्ग के धर्मनिरपेक्ष लोग लड़ते आये है। अब समय आ गया है की अल्पसंख्यक वर्ग भी देश के धर्मनिरपेक्ष वर्ग के साथ खड़ा होकर देश के संविधान और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बचाये।
वरिष्ठ पत्रकार हिम्मत सेठ ने कहा की दुनिया में सबसे पहले NRC 1906 अंग्रेज़ो ने दक्षिण अफ्रीका में लागू करने की चेष्टा की थी जिसका महात्मा गाँधी और वहां की जनता ने पुरजोर विरोध किया था और आखिरकार 1913 में अंग्रेज़ो को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। आज भी गांधीवाद के दम पर दिल्ली के शाहीन बाग़ जैसा आंदोलन मेवाड़ की धरती पर करने की आवश्यकता है।
वहीँ बोहरा जमात के वरिष्ठ नेता आबिद हुसैन अदीब ने कहा की बोहरा यूथ हमेशा से कट्टरवाद और फासीवाद के खिलाफ लड़ता आया है और लड़ता रहेगा। भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरुप को बचाने के लिए जिन लोगो ने अपनी कुर्बानिया दी है वह कभी बेकार नहीं जाएगी।
दाऊदी बोहरा जमात के प्रवक्ता मंसूर अली ओड़ावाला ने बताया की इस अवसर पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ दाऊदी बोहरा कम्युनिटी सेंटर के आबिद हुसैन अदीब, कमाण्डर मंसूर अली बोहरा, डॉ ज़ैनब बानू, दाऊदी बोहरा जमात के सचिव ज़ाकिर हुसैन पंसारी, बोहरा यूथ संस्थान के महासचिव गजनफर ओकासा, तौसीफ मंडी वाला, वरिष्ठ पत्रकार हिम्मत सेठ, अर्जुन देथा, प्रोफ़ेसर हेमेंद्र चंडालिया, प्रोफ़ेसर आर एल व्यास, शंकर लाल चौधरी, अधिवक्ता डॉ अरुण व्यास, सीपीएम नेता राजेश सिंघवी, उषा चौधरी, सुधा चौधरी और अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे
कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर हेमेंद्र चंडालिया ने उपस्थित सभी लोगो को संविधान और धर्मनिरपेक्षता की शपथ दिलाई वहीँ धन्यवाद की रस्म बोहरा यूथ के महासचिव गज़न्फर ओकासा वाला ने निभाई। कार्यक्रम का संचालन प्रो. हेमेंद्र चंडालिया ने किया।