हरियाणा में पटवारियों को स्टाइपेंड की जगह मिलेगा वेतन, सैनी सरकार का बड़ा फैसला
Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राजस्व पटवारी (समूह-सी) सेवा नियम, 2011 में संशोधनों को मंज़ूरी दे दी गई। इन संशोधनों का उद्देश्य राजस्व पटवारियों के भर्ती और प्रशिक्षण ढांचे का आधुनिकीकरण करना, उनकी सेवा शर्तों में सुधार करना तथा राजस्व प्रशासन को अधिक कुशल और उत्तरदायी बनाना है। संशोधित नियम 1 जनवरी, 2025 से लागू माने जाएंगे।
मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया एक प्रमुख निर्णय नए नियुक्त पटवारियों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण अवधि को डेढ़ वर्ष से घटाकर एक वर्ष करना है। संशोधित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पटवार स्कूल में छह महीने का संस्थागत प्रशिक्षण और उसके बाद छह महीने का फील्ड प्रशिक्षण शामिल होगा। यह निर्णय राज्य स्तरीय पटवारी सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप लिया गया है और इससे फील्ड ड्यूटी के लिए प्रशिक्षित पटवारियों की जल्द उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल ने नए नियुक्त पटवारियों की सेवा शर्तों में महत्वपूर्ण सुधार को भी मंज़ूरी दी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान वजीफा (स्टाइपेंड) मिलने के बजाय, अब उन्हें फंक्शनल पे-लेवल-2 (FPL-2) में 19,900 रुपये का शुरुआती वेतन दिया जाएगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर, उन्हें पिछले फंक्शनल पे-लेवल-4 के स्थान पर 32,100-1,02,000 रुपये के वेतनमान के साथ फंक्शनल पे लेवल-5A में रखा जाएगा।
पेशेवर दक्षता सुनिश्चित करने के लिए, संशोधित नियमों में प्रावधान है कि अस्थायी रूप से नियुक्त प्रत्येक पटवारी को निर्धारित अवधि के भीतर विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अधिकतम चार अवसर दिए जाएंगे।
संशोधित नियमों में यह भी प्रावधान है कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान कोई वार्षिक वेतन वृद्धि (increment) स्वीकार्य नहीं होगी, और पहली वेतन वृद्धि नियमित नियुक्ति का एक वर्ष पूरा होने के बाद ही देय होगी। कर्मचारियों के हित में किए गए एक अन्य उपाय के तहत, उम्मीदवारों को केवल पांच जिलों की वरीयता देने के मौजूदा प्रावधान को बदलकर पदस्थापना के लिए सभी जिलों को चुनने का विकल्प दिया गया है।
मंत्रिमंडल ने राजस्व पटवारियों को हरियाणा सिविल सेवाएं (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के प्रावधानों के तहत लाकर अनुशासनात्मक मामलों से संबंधित संशोधनों को भी मंज़ूरी दे दी है, जिसमें सेवा नियमों में संशोधित अनुशासनात्मक और अपीलीय अधिकारियों को निर्दिष्ट किया गया है।
इसके अलावा, विभागीय परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को कंप्यूटर अनुप्रयोगों, भूमि अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियों, डैशबोर्ड, पोर्टल और अन्य डिजिटल गवर्नेंस प्रणालियों को शामिल करने के लिए अपडेट किया गया है, जिससे पटवारी तेजी से प्रौद्योगिकी-संचालित होते राजस्व प्रशासन में अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सकें।
