व्यक्ति जीवन में मौन और मुस्कान धारण करे: सुप्रकाशमति माताजी
राष्ट्र संत गुरु मां गणिकी आर्यिका साध्वी सुप्रकाशमति माताजी ने कहा कि पुण्य कर्मों के संचय से इस मानव जन्म का उदय
राष्ट्र संत गुरु मां गणिकी आर्यिका साध्वी सुप्रकाशमति माताजी ने कहा कि पुण्य कर्मों के संचय से इस मानव जन्म का उदय हुआ है। इसे यूँ ही व्यर्थ गंवाने के बाद पछताने से कुछ नही होगा। इसका सदुपयोग करना चाहिए। वे मंगलवार को श्री चन्द्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे ओहले मौन धारण करने का संकल्प करें यानी जितनी जरूरत हो उतना ही बोलें। व्यर्थ बोलने से जो ऊर्जा नष्ट होती है, उसे बचाएं और सही कामों में लगाएं। दिगंबर साधु साध्वी अमूमन मौन ही रहते हैं। दूसरी बात कि आप जिससे भी मिलें, मुस्कुराकर मिलें। हंस कर मिलेंगे तो आप सभी को प्रिय लगेंगे। अगर आपका किसी से झगड़ा भी हो तो उससे दो मिनट मुस्कुराकर बात कर लें, झगड़ा हमेशा के लिए मिट जाएगा और आप मित्र बन जाओगे। कहने का अभिप्राय यह कि जीवन में मौन और मुस्कान धारण कर लें। मौन आपका कवच बनेगा और मुस्कान स्वागत द्वार।
गुरु मां का पाद प्रक्षालन का सौभाग्य आज कुशलचंद कोडिया परिवार को मिला। ओमप्रकाश गोदावत ने बताया कि गुरु मां के नेतृत्व में चल रही संस्कार पदयात्रा 26 अक्टूबर को सुबह 8 बजे पहाड़ा उपनगर में प्रवेश करेगी जहां भव्य स्वागत किया जाएगा। 28 अक्टूबर से यहां गुरु मां के सान्निध्य में सिद्धचक्र महामंडल विधान जिनेन्द्र अर्चना आदि सम्पन्न होंगे।
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