[फोटो] 'बहुरंग': सुमधुर धुनों पर झूमें श्रोता
इंदिरा गांधी राष्ट्रिय मानव संग्रहालय, भोपाल द्वारा आयोजित 'बहुरंग' कार्यक्रम के चौथे दिन क्राफ्ट मेले में भारी भीड़ रही। उज्जैन से आये शिल्पकार, लौह शिल्पकार एंव उतर-पूर्वी राज्यों से आये शिल्पकार लोगों को अपनी क्राफ्ट के बारे में बताने में एवं विक्रय में व्यस्त रहे।
इंदिरा गांधी राष्ट्रिय मानव संग्रहालय, भोपाल द्वारा आयोजित ‘बहुरंग’ कार्यक्रम के चौथे दिन क्राफ्ट मेले में भारी भीड़ रही। उज्जैन से आये शिल्पकार, लौह शिल्पकार एंव उतर-पूर्वी राज्यों से आये शिल्पकार लोगों को अपनी क्राफ्ट के बारे में बताने में एवं विक्रय में व्यस्त रहे।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दूसरा दिन आज पहले दिन से पूरी तरह भिन्न था। पं.बंगाल उड़ीसा, असम, मणिपुर आदि नृत्यों ने ऐसा समां बांधा कि लोक भाव-विभोर हो उठे। राजस्थान के चकरी नृत्य ने लोगों को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। उत्तर पूर्वी राज्यों के कलाकारों की प्रस्तुति में गीतों के बोल पूरी तरह से समझ में न आने पर भी उनकी सुमधुर धुनों पर दर्शक झूमते नज़र आये, इसलिए यह कहा जाता है कि संगीत की कोई भाषा नहीं होती।
चित्रकारों की कार्यशाला का आज चौथा दिन था। दिन भर कला की समझ रखने वाले शहर के लोगों का कार्यशाला में आना जारी रहा। कल बहुरंग कार्यक्रम का अंतिम दिन है।
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