गीतांजली में राजनियोकाॅन का आगाज़
गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल, उदयपुर के बाल एवं शिशु रोग विभाग तथा आरएनटी मेडिकल काॅलेज के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय नियोनेटोलोजी फोरम राजस्थान का वार्षिक सम्मेलन राजनियोकाॅन का उद्घाटन समारोह गीतांजली आॅडिटोरियम में आयोजित हुआ।
गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल, उदयपुर के बाल एवं शिशु रोग विभाग तथा आरएनटी मेडिकल काॅलेज के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय नियोनेटोलोजी फोरम राजस्थान का वार्षिक सम्मेलन राजनियोकाॅन का उद्घाटन समारोह गीतांजली आॅडिटोरियम में आयोजित हुआ।
’अपरिचित तक पहुँच’ विषयक सम्मेलन के मुख्य अतिथि गीतांजली ग्रुप के चेयरमेन जेपी अग्रवाल, डाॅ आरके नाहर वाईस चांसलर गीतांजली यूनिवर्सिटी, अंकित अग्रवाल कार्यकारी निदेशक गीतांजली ग्रुप, डाॅ किशोर पुजारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी गीतांजली हाॅस्पिटल, डाॅ जीएल डाड चिकित्सा अधीक्षक, डाॅ अजय गंभीर पूर्व अध्यक्ष एनएनएफ, डाॅ आलोक भंडारी सचिव एनएनएफ, डाॅ वीपी गोस्वामी राष्ट्रीय संयोजक, डाॅ धननजय मंगल अध्यक्ष एनएनएफ, डाॅ एसएन मित्तल निदेशक आरसीएच, डाॅ देवेंद्र सरीन विभागाध्यक्ष बाल एवं शिशु रोग विभाग जीएमसीएच, डाॅ सुरेश गोयल विभागाध्यक्ष बाल एवं शिशु रोग विभाग आरएनटी मेडिकल काॅलेज, डाॅ महेंद्र जैन नियोनेटोलोजिस्ट जीएमसीएच, डाॅ लाखन पोसवाल यूनिट हेड बाल एवं शिशु रोग विभाग आरएनटी मेडिकल काॅलेज एवं डाॅ ललन भंडारी कोषाध्यक्ष एनएनएफ द्वारा दीप प्रजवल्लन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
उद्घाटन समारोह में सभी विशिष्ट अतिथियों द्वारा त्।श्रछम्व्ब्व्छ 2017 की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। साथ ही सभी अतिथियों द्वारा जेपी अग्रवाल का भी सम्मान किया गया। आयोजन अध्यक्ष डाॅ देवेंद्र सरीन ने सम्मेलन में उपस्थित भारत के विभिन्न राज्यों से आए अतिथियों एवं प्रतिनिधयों का स्वागत किया। एवं 500 से अधिक प्रतिनिधियों के पंजीकरण को अब तक हुए कई सम्मेलनों में से सबसे अधिक होने पर आभार व्यक्त किया। डाॅ अजय गंभीर ने नवजात चिकित्सा उपचार हेतु उपलब्धता और सामाथ्र्य पर उदयपुर शहर को सराहा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नवजात को बचाना है और भारत को नवजात की देखभाल का हब बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में हर साल 26 लाख नए जन्म होते है जिनकी देखभाल हेतु एनएनएफ ने गुणवत्ता सुधार पर ध्यान केंद्रित करना और नवजातों में जटिलताओं को कम करने के लिए 2010 से ही मेक इन इंडिया मुहिम शुरु की थी।
इसी क्रम में डाॅ एसएन मित्तल ने बताया कि एनएनएफ ने नर्सिंग स्टाफ एवं डाॅक्टरों को नवजात में पूर्ण एवं समर्पित देखभाल के लिए 5 दिन का प्रशिक्षण एवं 7 क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की है जिससे नवजात मृत्यु दर को कम किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस दर को कम करने के लिए एक गर्भवती महिला की सम्पूर्ण देखभाल करनी होगी और प्रोटोकाॅल का पालन एवं प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति करनी होगी। जेपी अग्रवाल ने सम्मेलन के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त कर बधाई दी। साथ ही कहा कि ऐसे सम्मेलन के आयोजन से मंच पर प्रस्तुत हुए विशेषज्ञों के अनुभव, विचार, रिसर्च पेपर इत्यादि नए डाॅक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ के लिए ज्ञान का माध्यम है जो उन्हें प्रशिक्षित करते है एवं लाभदायी होते है।
डेलक्योर लाइफ सांइसेज़ लिमिटेड के एमडी एवं सीईओ पीके पाठक ने अपने व्यक्तव्य में वर्तमान में नीतप्रति हो रहे डाॅक्टरों पर हमले तथा जनता में उनके प्रति कम हो रहे भरोसे पर चिन्ता व्यक्त की। कार्यक्रम में ‘बेंच टू बेड साइड’ एवं बिमार नवजात शिशु के हृदय संबंधी रोगों की निगरानी पर सम्मेलन में आए संकायों द्वारा विचार प्रस्तुत किए गए।
