पेपर लीक मामले पर राजनीति तेज, सांसद राजकुमार रोत ने कांग्रेस-भाजपा पर साधा निशाना
कटारा की आरपीएससी नियुक्ति और कांकरी डूंगरी प्रकरण को बताया राजनीतिक , सभी जिम्मेदार नेताओं के नाम उजागर करने की मांग
उदयपुर ,13 जनवरी 2026 - पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। सांसद सांसद राजकुमार रोत ने पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय का नाम लेते हुए कहा कि कांग्रेस में रहते हुए उन पर कई आरोप लगे थे, लेकिन बाद में वे भाजपा की तथाकथित वॉशिंग मशीन में धुलकर साफ हो गए और अब फिर से कांग्रेस में लौट आए हैं। रत ने कहा कि मालवीय कहीं भी जाएं, इससे उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन सवाल जरूर खड़े होते हैं।
सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि कटारा को सदस्य बनाए जाने का अवसर आदिवासी क्षेत्र के लिए गर्व की बात हो सकती थी, लेकिन जैसे ही गिरफ्तारी हुई, पूरे मामले को इस तरह पेश किया गया जैसे किसी आदिवासी अधिकारी ने भ्रष्टाचार किया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद जिन नेताओं का पेपर लीक से सीधा संबंध था, उन्होंने कटारा से दूरी बना ली। रत ने कांकरी डूंगरी प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि बाबूलाल कटारा को कांग्रेस सरकार के समय आरपीएससी का सदस्य बनाना कोई सामाजिक फैसला नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक और स्वार्थ से जुड़ा निर्णय था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में डूंगरपुर-खेरवाड़ा क्षेत्र में कांकरी डूंगरी प्रकरण हुआ था, जिसे लोग आज भी नहीं भूल सकते। कटारा को सदस्य बनाए जाने के कुछ ही दिनों बाद उन्हें इनाम के तौर पर पद दिया गया।
सांसद ने आरोप लगाया कि कांकरी डूंगरी प्रकरण को शांत कराने के लिए नेताओं ने बाबूलाल कटारा के नाम की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिए गए एक ब्रीफ नोट में भी यह उल्लेख किया गया था कि इस प्रकरण को शांत कराने में कटारा की अहम भूमिका रही है और इसी के चलते कांग्रेस ने उन्हें आरपीएससी का सदस्य बनाकर इनाम दिया।
उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने कटारा के नाम की सिफारिश की थी, वही नेता आज किनारे हो गए हैं और अपनी छवि सुधारने में लगे हैं। रत ने भाजपा सरकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली डबल इंजन सरकार यह क्यों नहीं बता रही कि इस पूरे मामले में कौन-कौन नेता शामिल थे और उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या आरपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन और अन्य सदस्य इस मामले में शामिल नहीं थे। रत ने कहा कि पेपर लीक का गिरोह लंबे समय से सक्रिय है, लेकिन सारा दोष केवल कटारा पर मढ़ दिया गया है, जबकि असली जिम्मेदार नेता बच निकलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इस मामले में शामिल सभी नेताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
महेंद्रजीत सिंह मालवीय को लेकर भी राजकुमार रोत ने सवाल उठाए और कहा कि जब मालवीय कांग्रेस से भाजपा में गए थे, तब उन्होंने राम मंदिर जाने से जुड़ा बयान दिया था। अब जब वे दोबारा कांग्रेस में लौट आए हैं, तो कांग्रेस क्या उन्हें राम मंदिर जाने के लिए कहेगी। रोत ने कहा कि दोनों ही पार्टियों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, लेकिन अंत में दोनों ने ही लूट का काम किया। सांसद रत ने यह भी कहा कि कटारा द्वारा ईडी को दिए गए बयान में खुद की जान को खतरा बताया गया है, जिसकी गहन जांच की जानी चाहिए।
