फसल कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी एवं प्रबन्धन तकनीेकी
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी केन्द्र में सात दिवसीय “कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी एवं प्रबन्धन तकनीकी” विषय पर प्रशिक्षण शुरू हुआ।
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी केन्द्र में सात दिवसीय “कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी एवं प्रबन्धन तकनीकी” विषय पर प्रशिक्षण शुरू हुआ।
यह प्रशिक्षण कृषि मंत्रालय, हरियाणा के सोजन्य से आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण क्रार्यक्रम मे 30 कृषि अभियंता प्रशिक्षण हेतु भाग ले रहे है। जिसमें 20 प्रशिक्षाणार्थी हरियाणा सरकार ने नामित किये है।
कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी केन्द्र के शोध अभियन्ता डॉ. वी. डी. मुद्गल ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रशिक्षण के दौरान अनाज, दलहन, तिलहन, फल एवं सब्जियों के प्रसंस्करण तथा मूल्यसंवर्धन के साथ गृह उद्योग उपयोगी मसाला प्रसंस्करण इत्यादी विषयो प्रबन्धन की जानकारी दी जायेगी।
इस उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि डा. पी. एल. मालीवाल अनुसंधान निदेशक, महाराणा प्रताप कृषि एवं विश्वविद्यालय ने बताया कि भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार एवं विश्विद्यालय कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होने विभिन्न फसलों एवं फल तथा सब्जियों कटाई उपरान्त होने वाली क्षति के बारे में बताते हुए कहा कि इस क्षति को रोकना बहुत जरूरी है। डा. मुद्गल एवं सहयोगार्थीयों ने इस दिशा में सराहनीय काम किया है। एवं लघु किसानों हेतु विभिन्न प्रकार की मशीनें बनायी है जिनका प्रयोग रखते हुए किसान अपना नुकसान कम कर सकते है।
इस उद्घाटन सत्र के विशिष्ठ अतिथि श्री विनोद कुम्मट, अध्यक्ष युसीसीआई, उदयपुर ने भण्डारण की उपयोगिता पर जोर देते हुए आवहान किया कि इस प्रशिक्षण में आये हुए प्रतिभागी प्रशिक्षण का भरपूर फायदा उठायेंगें व अपने राज्य में जाकर इसका वहा प्रयोग करेंगें।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. बी. पी. नन्दवाना ने बताया प्रशिक्षण से किसानो को प्रसंस्करण का तकनीकी ज्ञान बढाने मे सहायता मिलेगी । फसलो का प्रसंस्करण व मूल्यसंवर्धन कर स्वंय सहायता समूह द्वारा अतिरिक्त आमदनी व रोजगार के साधन उत्पाद क्षेत्रों मे ही जुटाये जा सकते हैं।
डा. एन. के जैन, सहप्राध्यापक ने कार्यक्रम के अन्त में माननीय अतिथियों एवं प्रतिभागीयों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
