प्राणायाम एवं ध्यान शिविर का आयोजन 8 मार्च से

उदयपुर में आर्ट ऑफ लिविंग संस्थान द्वारा बी.एन.कॉलेज के प्रांगण में तीन दिवसीय प्राणायाम एव ध्यान शिविर (पीडीएस) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। दिनांक 8 से 10 मार्च 2017 तक चलने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रम ख्याति प्राप्त योगगुरू स्वामी परमतेजजी के सानिध्य में संचालित किया जायेगा।शिविर का समय सुबह 6 से 8 एवं शामको 5 से 7 बजे का रहेगा।“

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प्राणायाम एवं ध्यान शिविर का आयोजन 8 मार्च से

उदयपुर में आर्ट ऑफ लिविंग संस्थान द्वारा बी.एन.कॉलेज के प्रांगण में तीन दिवसीय प्राणायाम एव ध्यान शिविर (पीडीएस) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। दिनांक 8 से 10 मार्च 2017 तक चलने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रम ख्याति प्राप्त योगगुरू स्वामी परमतेजजी के सानिध्य में संचालित किया जायेगा।शिविर का समय सुबह 6 से 8 एवं शामको 5 से 7 बजे का रहेगा।“

6 मार्च 2017 को सुबह उदयपुर आगमन के पश्चात स्वामी परमतेजजी ने एम जी एम एड्रोईट कम्प्यूटर संस्थान पर प्रेस वार्ता आयोजित करी जिसमें उन्होनें प्राणायाम, योग एवं ध्यान की महत्ता को बताया।योग के विषय में उन्होने बताया कि शरीर एवं मन को आत्मा से जोड़ना योग कहलाता है। “योग का प्रयोजन है कि कष्ट आने से पहले ही उसे रोक दे।“सभी नकारात्मक भावों जैसे की काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या एंव निराश द्वारा इन्हें रोका जा सकता है।क्या आपने ध्यान दिया है कि जब आप प्रसन्न होते हो, कोई तारीफ कर रहा हो तब कुछ विस्तृत होने का आभास होता है।जब आप हारते है या फिर हमारी कोई निंदा करता है तो भी कुछ सिकुड जाता है।अधिकतर हमारे नकारात्मक भावो को लेकर हम असहाय महसूस करते है।

विद्यालय या घर पर हमें कभी भी किसी नें नकारात्मक भावनाओं का सम्भलना नहीं सिखाया योग इस मनोस्थिति को परिवर्तित करने का रहस्य जानता है। यही हमें आजादी का अनुभव देता है। योग हमें और जिम्मेदार बनने में भी सहायक होता है। इसे कर्म योगकहते है।हम अपने जीवन में अनेको भूमिका निभाते है। योग से हम एक जिम्मेदार शिक्षक, वैद्य, व्यापारी व नागरिक बन सकते है। योग हमें दूसरो की परवाह करना, बाटँना एवं जिम्मेदार बनना सिखाता है।यह गुण हम सब में हैपर योग इनका पोषण करता है।

योग हमारी जागृत्तता एवं चेतना विस्तृतकरता है।हमें सब अपना ही हिस्सा लगने लगते है। अपनीपहचान या अस्तित्व को खोने का डर बहुत पुराना है। योग के आठ अंग है। जिनमें से एक शारीरिक आसन है, पर योग का मूल ज्ञान मन को स्थिर रखना है।जब हम कोई कार्य सचेत होकर कर सकते है, जब हमें ज्ञान रहना है कि हम क्या बोल रहे है या कर रहे है तो हम योगी हो जाते है। यह क्या है। यह जानना विज्ञान है।मैं कौन हुँ? “यह जानना आध्यात्म है।

योग का पूर्ण ज्ञान एक नवजात शिशु में होता है। बच्चे सोते वक्त जिन मुद्रा को बनाते है।दुनिया के कोई भी कोने मे जब बच्चे लेटे होते है तब वह पहले अपना पैर उठाते है। फिर पेट के बल आकर अपने कंधो को उठाते है (भुजंगासन) । हमारे सांस लेने का तरीका बच्चो से बहुत अलग होता है। एक बच्चे का मन तनाव-मुक्त एवं प्रसन्न होता है।इस प्रकार योग अपनी जडो़ की तरफ वापस जाना है।

प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुये राजस्थान के प्रथम एपेक्स बॉडी श्री देव वासवानी ने बताया कि ”उद्योग जगत में इस तरह के शिविर आयोजित करने से कर्मचारी वर्ग तनाव मुक्त होकर अपना कार्य सुचारू रूप से करते है जिससे कम्पनी की उत्पादक क्षमता एवंगुण वक्ता में बढ़ोतरी होती है।”

कार्यक्रम के प्रचार प्रमुख श्री हातिम अली ने बताया कि -“आर्ट ऑफ लिविंग संस्था का उद्दॆश्य पूरे विश्व को वसुद्यैव कुटुम्बकम की भावना रखते हुए एक परिवार के रूप में देखना, सभी जाति धर्म मजहब से उपर उठ कर मानव कल्याण के हितों के लिये जीना ही जीवन जीने की कला है।“

आर्ट ऑफ लिविंग प्रशिक्षक सुश्री अपूर्वा एवं सुश्री विक्ट्री जावा ने बताया कि इस कार्यक्रम में लगभग 10 से 15,000 लोगों के भाग लेने का अनुमान है। जिसमें उदयपुर एवं आसपास के क्षैत्रों से भी लोग शामिल होंगे। इसके लिये तैयारियाँ जौर शोर से जारी है।

शिविर में प्रवेश केवल पास के आधार पर ही दिया जा रहा है। अस्थाई कार्यालय उदयपुर में मधुबन स्थित आईकान केन्द्र को बनाया गया है।जहाँ कोई भी व्यक्ति सायं 6 से 7 बजे के मध्य सम्पर्क कर कार्यक्रम की जानकारी प्राप्त कर सकते है। इसके अतिरिक्त उदयपुर में निम्न स्थानों पर भी पास प्राप्त किये जा सकते है- शक्तिनगर क्षैत्र में “तलाश“ कम्युनिटी हॉल के पास, पंचवटी में एम जी एम कम्प्यूटर एज्यूकेशन,  हिरण मगरी सेक्टर 6 में वी एम मेडिकल स्टोर, सेटेलाईट के सामने, सेक्टर 11 में ग्रीन जलेबी एन्टरप्राईजेस, कम्युनिटी हॉल के पास, बेदला में नटवर ट्रेडिंग बड़गाँव लिंक रोड़, शास्त्री सर्कल पर शुभ लाभ मार्केटिंग कम्पनी, गुरूद्वारे के पास, दुर्गा नर्सरी रोड पर सुविधा एन्टरप्राईजेज

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