बिना किसी महंगी कोचिंग SDM बनी प्ररेणा, सेल्फ स्टडी के दम पर हासिल किया मुकाम
Udaipur Times, SDM Prerana Pranay : अक्सर कहा जाता है कि अगर किसी में अटूट संकल्प और कुछ हासिल करने का सच्चा जुनून हो, तो सबसे बड़ी चुनौतियां भी घुटने टेक देती हैं। सफलता कभी भी महंगे कोचिंग संस्थानों या बड़े शहरों पर निर्भर नहीं होती; बिहार की रहने वाली प्रेरणा प्रणय ने इसे सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में 288वीं रैंक हासिल की और SDM (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट) का पद प्राप्त किया।
जहां कई उम्मीदवार महंगी कोचिंग क्लास में दाखिला लेकर या घंटों तक खुद को कमरे में बंद करके तैयारी करते हैं, वहीं प्रेरणा ने बिना किसी बाहरी कोचिंग के, पूरी तरह से घर पर सेल्फ-स्टडी करके यह मुकाम हासिल किया। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन उम्मीदवारों के लिए भी प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं या उन्हें कम आंकते हैं।
सच तो यह है कि जब किसी का संकल्प मजबूत होता है, तो रास्ते में आने वाली हर बाधा छोटी लगने लगती है।
महंगी कोचिंग के बजाय सेल्फ-स्टडी को चुना
ऐसे दौर में जब छात्र अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटरों में लाखों रुपये खर्च करते हैं, प्रेरणा प्रणय ने सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया और सफलता की अपनी राह खुद बनाई। उन्होंने दिखाया कि सही दिशा में केंद्रित प्रयासों के साथ, कोई भी घर पर प्रभावी ढंग से पढ़ाई कर सकता है और केवल सेल्फ-स्टडी से सफलता हासिल कर सकता है। आपको महंगे कोचिंग सेंटर की ज़रूरत नहीं है; बस सफल होने का दृढ़ संकल्प और एक केंद्रित सोच की आवश्यकता है।
परीक्षा के पैटर्न को समझना बहुत ज़रूरी
अपनी तैयारी के दौरान, प्रेरणा ने परीक्षा के सिलेबस और पैटर्न को गहराई से समझने पर बहुत ध्यान दिया। उनका मानना है कि अपनी खूबियों और कमियों को पहचानना ज़रूरी है एक ऐसी बात जो कोई कोचिंग क्लास आपको नहीं सिखा सकती। प्रेरणा ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी तैयारी के दौरान एक सख्त और अनुशासित टाइम-टेबल का पालन किया। रोज़ाना पढ़ाई के लक्ष्यों को पूरा करना और बिना किसी ढिलाई के पढ़ाई की निरंतर दिनचर्या बनाए रखना उनके दैनिक शेड्यूल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था; इसी समर्पण ने उन्हें यह मुकाम हासिल करने में मदद की।
सटीक रणनीति अपनाकर 288वीं रैंक हासिल की
प्रेरणा की सफलता एक सुनियोजित रणनीति का परिणाम थी, जिसने उन्हें 288वीं रैंक हासिल करने में मदद की। इस रणनीति की मुख्य बातें ये थीं:
खुद के बनाए नोट्स
सिलेबस के हर टॉपिक को अच्छी तरह समझने के बाद उन्होंने अपने नोट्स खुद तैयार किए; तैयारी के आखिरी दौर में ये बहुत काम आए।
लगातार रिवीजन
नई-नई किताबें पढ़ने के बजाय, उन्होंने जो कुछ पहले पढ़ा था, उसे बार-बार दोहराने (रिवीजन करने) पर ध्यान दिया।
उत्तर लिखने की प्रैक्टिस
मुख्य परीक्षा (Main Examination) को ध्यान में रखते हुए, प्रेरणा ने नियमित रूप से उत्तर लिखने की प्रैक्टिस की। इससे न सिर्फ उनके उत्तर लिखने का तरीका बेहतर हुआ, बल्कि परीक्षा हॉल में समय का सही इस्तेमाल करने की उनकी क्षमता भी बढ़ी।
चुनौतियों के बीच भी संयम बनाए रखा
परीक्षा की तैयारी के लंबे सफर में प्रेरणा को कई उतार-चढ़ाव और निराशा के पलों का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह अपने लक्ष्य पर डटी रहीं, हर असफलता या रुकावट को सीखने के मौके के तौर पर देखा और आगे बढ़ती रहीं। आखिरकार, उनका धैर्य और निरंतरता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
तैयारी करने वालों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश
SDM बनने के बाद, प्रेरणा प्रणय अब उन हजारों युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन गई हैं जो महंगी कोचिंग फीस नहीं भर सकते। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से वह कहती हैं, "अपनी काबिलियत पर भरोसा रखें। कोचिंग सफलता की कोई गारंटी नहीं है। आपकी अपनी सच्ची मेहनत, सही रणनीति और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाते हैं।"
प्रेरणा की सफलता की कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि पक्के इरादे के साथ, घर पर रहकर भी राज्य की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास की जा सकती है और अपने सपनों को पूरा किया जा सकता है।