सोर्इल सर्वे पर प्रस्तुतीकरण कार्यशाला का आयोजन
जिला जलग्रहण विकास इकार्इ (भू संरक्षण परिसर), में उदयपुर जिले की आर्इडब्ल्यूए
जिला जलग्रहण विकास इकार्इ (भू संरक्षण परिसर), में उदयपुर जिले की आर्इडब्ल्यूएमपी परियोजना के अंतर्गत पंचायत समिति गिर्वा में स्वीकृत जलग्रहण क्षेत्रा चणावदा द्वितीय में किये गए सोर्इल सर्वे पर आधारित प्रजेन्टेशन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नर्इ दिल्ली के अधीन राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो उदयपुर के केन्द्र प्रमुख एवं प्रधान वैज्ञानिक आर.एस.सिंह के निर्देशन में दिया गया।
श्री सिंह ने बताया गया कि सोर्इल सर्वे के आधार पर प्राप्त तथ्यों को जलग्रहण क्षेत्रा में उपयोग में लेकर कृषि कार्य करने से उत्पादन में वृद्धि संभव है।
नेशनल ब्यूरो आफ सोर्इल सर्वे एण्ड लेण्ड यूज प्लानिंग, रीजनल सेन्टर उदयपुर के वैज्ञानिक रविन्द्र नेताम ने चणावदा जलग्रहण क्षेत्रा में किये गये सोर्इल सर्वे के बारे में विस्तृत जानकारी स्लाइडों के माध्यम से दी। उन्होने बताया कि पडूणा के भादवी फला क्षेत्रा की मृदा में कार्बन वनस्पति कन्टेन्ट काफी अच्छा है किन्तु पानी रोकने की मिट्टी की क्षमता काफी कम है। ऐसी सिथति में जहा भराव ज्यादा एकत्रित होता है वहा कच्ची तलार्इ के बजाय पक्की तलार्इ निर्माण करानी चाहिये।
इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्र होने से उच्च टोपोग्राफी पर मृदा गहरार्इ की उपलब्धता काफी कम है, ऐसे में फसल के चयन में कृषि वैज्ञानिक से सलाह ली जानी चाहिये।
प्रस्तुतीकरण के दौरान प्रौधोगिकी एवं अभियानित्राकी महाविधालय, उदयपुर के सोर्इल एण्ड वाटर कन्जरवेशन इन्जीनियरिंग विभाग के विभागाघ्यक्ष एस.आर. भाखर, सहायक प्राचार्य पी.के.सिंग ने भी सोर्इल सर्वे की उपयोगिता पर विचार व्यक्त किये।
कार्यशाला कम बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिशाषी अभियन्ता (भू संसाधन) एवं पदेन परियोजना प्रबन्धक मदन छाजेड़ ने बताया कि सभी अभियन्ताओं को सोर्इल सर्वे के बारे में मूल जानकारी होती है, जिनको वे अपनी परियोजनाओं में प्रयोग में लेते है तथा इस प्रकार के सोर्इल सर्वे किये जाने के पश्चात क्षैत्रा की मिटटी के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है जिसे कृषकों तक प्रचारित किया जाना चाहिये।
इस कार्यशाला में उदयपुर जिले की समस्त पंचायत समितियों के सहायक, कनिष्ठ अभियन्ताओं एवं जलग्रहण विकास दल सदस्यों ने भी भाग लिया। अंत में आभार पंचायत समिति गिर्वा के सहायक अभियन्ता जलग्रहण श्री प्रदीप सोमानी ने जताया।
