त्योहारी सीजन में दिल्ली-NCR समेत इन शहरों में बढ़ने जा रही है प्रॉपर्टी की मांग, 4.5 अरब डॉलर का निवेश
Property demand is set to rise in these cities : भारत का रियल एस्टेट बाजार 2026 के अंत की ओर एक सकारात्मक रुख के साथ बढ़ रहा है। इसे आवासीय मांग, कमर्शियल ऑफिस लीजिंग (किराए पर जगह लेना) और संस्थागत निवेश में हो रही वृद्धि का समर्थन मिल रहा है। त्योहारी सीजन से घरों की बिक्री और नई प्रॉपर्टी लॉन्च को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, हालांकि किफायती होने (अफोर्डेबिलिटी) से जुड़ी चिंताएं और निर्माण लागत में बढ़ोतरी इस सेक्टर के लिए अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं।
सैविल्स इंडिया (Savills India) के अनुसार, 2026 के पहले नौ महीनों में देश के शीर्ष छह शहरों में ऑफिस स्पेस की मांग (ऑफ़िस एब्जॉर्प्शन) 60.7 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 6% अधिक है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), टेक्नोलॉजी कंपनियों और वित्तीय सेवा फर्मों के विस्तार से कमर्शियल ऑफिस स्पेस की मांग को लगातार समर्थन मिल रहा है।
कुल ऑफिस लीजिंग में GCCs की हिस्सेदारी 30%
सैविल्स इंडिया में रिसर्च एंड कंसल्टिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर, अरविंद नंदन ने कहा, "भारत का रियल एस्टेट बाजार 2026 के अंत की ओर एक मजबूत स्थिति के साथ बढ़ रहा है। इसे आवासीय मांग, लगातार बनी हुई ऑक्यूपायर (जगह लेने वालों) की गतिविधि और संस्थागत भागीदारी में हो रही वृद्धि का समर्थन प्राप्त है।" उन्होंने आगे कहा कि आवासीय क्षेत्र में गतिविधि मोटे तौर पर स्थिर रहने की संभावना है, हालांकि त्योहारी सीजन के दौरान बिक्री में कुछ हद तक तेजी आ सकती है। खरीदार अब निर्माण की गुणवत्ता, लोकेशन, कनेक्टिविटी, रहने की सुविधा और दीर्घकालिक मूल्य (लॉन्ग-टर्म वैल्यू) को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
2026 में अब तक हुई कुल ऑफिस लीजिंग में GCCs की हिस्सेदारी 30% रही है, जो वैश्विक व्यापार और नॉलेज सेवाओं के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करती है। बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-NCR अपने स्थापित बिजनेस इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण कमर्शियल ऑक्यूपायर्स को लगातार आकर्षित कर रहे हैं।
संस्थागत निवेश में 16% की वृद्धि
निवेश गतिविधियों में भी तेजी आई है। सैविल्स इंडिया के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच भारतीय रियल एस्टेट में 4.5 बिलियन डॉलर का प्राइवेट इक्विटी निवेश हुआ है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16% अधिक है। जहां आवासीय और ऑफिस प्रॉपर्टी निवेश के महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं, वहीं इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं, हॉस्पिटैलिटी एसेट्स और डेटा सेंटर भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स और सप्लाई-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रही वृद्धि से वेयरहाउस और इंडस्ट्रियल स्पेस की मांग को और बढ़ावा मिल रहा है।
त्योहारी सीजन से हाउसिंग बिक्री को बढ़ावा मिल सकता है
रेजिडेंशियल सेगमेंट में, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-NCR में प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग मजबूत बनी हुई है। डेवलपर्स त्योहारी सीजन के दौरान घर खरीदने के इच्छुक लोगों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक ऑफर, फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान और नए प्रोजेक्ट लॉन्च कर रहे हैं।
रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशंक वासन ने कहा कि त्योहारी सीजन आमतौर पर घर खरीदारों के सेंटीमेंट को बढ़ावा देने का काम करता है, खासकर सोनीपत, बहादुरगढ़ और रोहतक जैसे उभरते टियर-2 बाजारों में। उन्होंने 'प्लॉटेड डेवलपमेंट' (जमीन के टुकड़ों) में बढ़ती दिलचस्पी का भी जिक्र किया, क्योंकि खरीदार जमीन के मालिकाना हक, फ्लेक्सिबिलिटी और लॉन्ग-टर्म वैल्यू की तलाश में रहते हैं।
हबटाउन लिमिटेड में मार्केटिंग कम्युनिकेशन और ब्रांड हेड रूपम डे ने कहा कि बाजार का आउटलुक उत्साहजनक बना हुआ है, जिसे एंड-यूजर की मांग, कमर्शियल लीजिंग और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट का समर्थन मिल रहा है।