न्यायालय में लंबित 50 वर्ष पुराना संपति विवाद मध्यस्था के माध्यम से सुलझा

पक्षकारों से की समझाइश, पक्षकारो ने राजीनामा से किया प्रकरण का निस्तारण
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उदयपुर 10 जनवरी 2026 । राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के तत्वावधान में ज़िला एवं सेशन न्यायाधीश एवं ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता के तत्वावधान में शुक्रवार को ए.सी.जे.एम 2 न्यायालय उदयपुर में लंबित 50 वर्ष पुराना संपत्ति विवाद मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारित किया गया।

प्रकरण के तथ्य इस प्रकार से है कि वादी द्वारा 50 वर्ष पूर्व एक सिविल वाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया कि प्रतिवादी के रिहायशी मकान का कुछ हिस्सा एवं उसके साथ जुडी हुई आवासीय भूमि का हिस्सा वादी का है। इस संबंध में राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा 25 वर्ष पूर्व प्रतिवदी को आदेश दिया गया था कि वादी को उक्त मकान का हिस्सा एवं खाली भूमि दिलवाई जाए। उच्च न्यायालय के आदेश की पालना हेतू प्रकरण ए.सी.जे.एम नम्बर 2 उदयपुर के न्यायालय में लंबित था।

उक्त सिविल वाद का शुक्रवार को आपसी राजीनामें से पक्षकारो को लोक अदालत की भावना से प्रकरण का निस्तारण किया गया। उक्त प्रकरण में वादी की और से अधिवक्ता लोकेश दवे, कांता नागदा एवं पंकज शर्मा उपस्थित रहे। इसी प्रकार प्रतिवादी की और से उक्त वाद में कन्हैया लाल टांक एवं वंदना चौहान उपस्थित रहे। उक्त प्रकरण में न्यायाधीश जज इंचार्ज मिडियेशन महेन्द्र कुमार दवे द्वारा पक्षकारो की समझाइश की गई। जज इन्चार्ज मिडियेशन एवं न्यायिक मध्यस्थ महेन्द्र कुमार दवे द्वारा की गई समझाइश से पक्षकारो द्वारा राजीनामें के आधार पर प्रकरण का निस्तारण किया गया।

एडीजे कुलदीप शमा ने आमजन से अपील की है कि यदि पक्षकारगण अपने राजीनामा योग्य प्रकरण का निस्तारण चाहते है एवं प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है तो पक्षकारगण स्वयं एव उनके अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा किया जाने हेतु निवेदन कर सकते है। पक्षकारों की समझाइश प्रशिक्षित मध्यस्थत न्यायिक अधिकारीगण एवं प्रशिक्षित अधिवक्तागण के माध्यम से करवाई जाकर प्रकरण का हमेशा के लिए निस्तारण किया जा सकता है ।

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