हरियाणा में इन संपतियों पर नहीं लगेगा प्रॉपर्टी टैक्स, सरकार ने लागू किया ये नया सिस्टम

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हरियाणा में इन संपतियों पर नहीं लगेगा प्रॉपर्टी टैक्स, सरकार ने लागू किया ये नया सिस्टम 

Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में नगर निगमों, नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं की सीमा के भीतर भवनों तथा भूमि पर संपत्ति कर लगाने की एक नई, सरलीकृत एवं पारदर्शी पद्धति को सैद्धांतिक (ULBs ) स्वीकृति प्रदान की गई।

यह नई पद्धति हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के अंतर्गत नगर निगमों के लिए तथा हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के अंतर्गत नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं के लिए अलग-अलग अधिसूचित की जाएगी, और वर्ष 2013 की संपत्ति कर अधिसूचनाओं के स्थान पर लागू होगी। इससे राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में मूल्यांकन की एक समान, सूत्र-आधारित प्रणाली लागू होगी।

पारदर्शिता एवं अनुपालन में सुगमता की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, नई प्रणाली में विवेकाधीन एवं जटिल मूल्यांकन प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूंजीगत मूल्य  की गणना हेतु एक स्पष्ट, सूत्र-आधारित पद्धति अपनाई गई है कृ जो प्लॉट क्षेत्र अथवा कारपेट क्षेत्र, लागू कलेक्टर दर, तथा फ्लोर फैक्टर पर आधारित है।

शहरों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है - नगर निगमों के लिए ए1 एवं ए2, तथा नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं के लिए बी एवं सी तथा प्रत्येक श्रेणी के लिए न्यूनतम एवं अधिकतम कर दरें निर्धारित की गई हैं। इससे संपत्ति मालिकों के लिए अधिक पूर्वानुमेयता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, जबकि नगर निकायों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित सीमा के भीतर दरें तय करने की लचीलापन प्राप्त होगी।

नई पद्धति में एक उपयोग-आधारित गुणन कारक भी शामिल किया गया है, जो संपत्ति के आकार एवं उपयोग की प्रकृति - आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत अथवा विशेष श्रेणी के आधार पर कर देयता को जोड़ता है, जिससे कर का बोझ समान एवं आनुपातिक बना रहे। संपत्ति मालिकों को अचानक वृद्धि से बचाने हेतु, नई प्रणाली के तहत कर देयता में वृद्धि को सीमित किया गया है तथा पूर्ण संशोधित मूल्यांकित मूल्य तक पहुंचने तक इसे चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा।

व्यापक छूट

जनहित को ध्यान में रखते हुए, नई नीति में संपत्ति कर से व्यापक छूट का प्रावधान किया गया है। प्रमुख छूटों में शामिल हैं :

-धार्मिक संपत्तियां, जिनमें मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे एवं मस्जिदें शामिल हैं, जो जनता को निःशुल्क सेवाएं प्रदान करती हैं – 100% छूट।

-पट्टे या किराए पर न दी गई नगरपालिका संपत्तियां।

-अनाथालय, वृद्धाश्रम, श्मशान एवं कब्रिस्तान तथा धर्मशालाएं।

-सरकारी शैक्षणिक संस्थान एवं सरकारी अस्पताल।

- विशुद्ध रूप से कृषि प्रयोजनों हेतु उपयोग की जाने वाली संपत्तियां।

- सभी गौशालाएं (दूध, डेयरी उत्पाद, जैविक उर्वरक, बायो-सीएनजी/ध्बायोगैस, गोबर एवं गोमूत्र की बिक्री के अतिरिक्त किसी व्यावसायिक प्रयोजन हेतु प्रयुक्त भाग को छोड़कर)।

-सेवारत / भूतपूर्व सैनिकों एवं अर्धसैनिक बल कार्मिकों तथा शहीद सैनिकों के परिवारों के स्व-अधिवासित आवासीय मकान (250 वर्ग मीटर तक)।

-स्वतंत्रता सेनानियों, उनके जीवनसाथी एवं युद्ध विधवाओं के स्व-अधिवासित आवासीय मकान।

- धर्मार्थ शैक्षणिक संस्थान, धर्मार्थ अस्पताल, तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) हेतु विद्यालय।

- नगरपालिका सीमा में नव-सम्मिलित गांवों के लाल डोरा क्षेत्र में स्थित आवासीय संपत्तियां, सम्मिलन की तिथि से पांच वर्षों तक (अधिकतम तीन मंजिल तक)।

- निःशुल्क अथवा अवैतनिक पार्किंग इकाइयां।

अनुपालन एवं सामाजिक कल्याण को प्रोत्साहित करने हेतु छूट

नई पद्धति में समय पर अनुपालन को पुरस्कृत करने तथा सामाजिक कल्याण उद्देश्यों को समर्थन देने हेतु एक संरचित छूट ढांचा भी शामिल किया गया है। प्रमुख छूट इस प्रकार हैं :

-नगरपालिका सीमा में स्थित मौजूदा गांवों के लाल डोरा क्षेत्र की आवासीय संपत्तियों पर संपत्ति कर में 75 % छूट

- प्रति संपत्ति अधिकतम 25 % तक संयुक्त छूट, जिसमें शामिल है .

-चालू आकलन वर्ष के 30 अप्रैल तक बकाया राशि सहित सभी देय राशियों का भुगतान करने पर 10 % छूट .

- लगातार 3 पूर्ववर्ती वर्षों तक समय पर कर भुगतान करने वाले अच्छे करदाताओं को 5 % छूट

- महिलाओं के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 25 % छूट (संयुक्त स्वामित्व की स्थिति में आनुपातिक)।

-दिव्यांग व्यक्तियों (40% या अधिक दिव्यांगता) के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 10% छूट

- पूर्ण रूप से क्रियाशील शून्य-अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली वाले ग्रुप हाउसिंग सोसायटी / प्रॉपर्टी क्लस्टर हेतु 10 % छूट .

इन छूटों का उद्देश्य समय पर भुगतान, पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं तथा समावेशी स्वामित्व को प्रोत्साहित करना है।

संपत्ति मालिकों के लिए सुगम लेन-देन

सुगम लेन-देन सुनिश्चित करने हेतु, संपत्ति मालिकों के पास नई अधिसूचना की तिथि से एक माह तक पुरानी वर्ष 2013 अधिसूचना के अनुसार कर भुगतान का विकल्प रहेगा, जिसके पश्चात संशोधित प्रणाली लागू होगी। जिन संपत्ति मालिकों ने पहले ही अपना बकाया चुका दिया है, उन पर इस नई अधिसूचना का वित्तीय वर्ष 2026-27 तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं उससे पूर्व के बकाया एवं ब्याज पर कोई असर नहीं होगा।

यह ऐतिहासिक सुधार हरियाणा के शहरी स्थानीय निकायों में संपत्ति कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समतापूर्ण एवं नागरिक-अनुकूल बनाने के साथ-साथ बेहतर नागरिक सेवाओं एवं अवसंरचना के वित्तपोषण हेतु नगर निकायों के राजस्व आधार को सुदृढ़ करेगा।

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