बाल अधिकारों का संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी – डाॅ. पण्ड्या
संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन 1986 के अनुसार बच्चो को 54 अनुच्छेद में कई अधिकार दिए गए है उन्हें सम्मिलित रूप से हम चार मुख्य अधिकारों में समझ सकते है - जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार एवं सहभागिता का अधिकार। इन्हीं अधिकारों की पूर्ती हेतु हमारे देश में कई कानून एवं योजनाए बनी है परन्तु जब तक हर नागरिक या हम सभी मिलकर बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु योगदान नहीं देंगे तब तक बच्चो का शोषण होता रहेगा।

संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन 1986 के अनुसार बच्चो को 54 अनुच्छेद में कई अधिकार दिए गए है उन्हें सम्मिलित रूप से हम चार मुख्य अधिकारों में समझ सकते है – जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार एवं सहभागिता का अधिकार। इन्हीं अधिकारों की पूर्ती हेतु हमारे देश में कई कानून एवं योजनाए बनी है परन्तु जब तक हर नागरिक या हम सभी मिलकर बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु योगदान नहीं देंगे तब तक बच्चो का शोषण होता रहेगा।
उक्त विचार बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं बाल सुरक्षा नेटवर्क के संयोजक डाॅ. शैलेन्द्र पण्ड्या ने शहर के साइफन चैराहे स्थित कासा प्रशिक्षण केन्द्र में विश्व बाल दिवस सप्ताह के समापन के अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान के मार्गदर्शन में गायत्री सेवा संस्थान द्वारा आयोजित “बाल अधिकार संगोष्ठी” में मुख्य वक्ता के तौर पर सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।
इस अवसर पर श्री आसरा विकास संस्थान के संस्थापक निदेशक भोजराज सिंह पद्मपुरा ने पूरे राष्ट्र में यूनिसेफ द्वारा चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए विश्व बाल दिवस पर संचालित गो ब्लयू केम्पन की जानकारी दी।
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संगोष्ठी में आई. आई. एफ. एल. फाउण्डेशन के प्रतिनिधी प्रवीण कुमार पानेरी ने भारत एवं राज्य सरकार द्वारा बच्चो के लिए संचालित विभिन्न योजनाओ की समिक्षा रिर्पोट प्रस्तुत करते हुए दक्षिण राजस्थान में बाल अधिकारों के संरक्षण की बात कही। संगोष्ठी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमाल के प्रधानाध्यापक शान्तिलाल शर्मा, गायत्री सेवा संस्थान से मनीष शर्मा, पुरणमल भाट, जिग्नेश दवे ने अपने विचार प्रकट किए।
गायत्री सेवा संस्थान द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में पूरे जिले में बच्चो के मुद्दो पर कार्यरत स्वयं सेवी संगठनों, स्वयं सेवको एवं बाल सुरक्षा नेटवर्क के प्रतिनिधी उपस्थित रहे।