राजस्थान में बनेगा भारत का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज पार्क, RERC ने दी मंजूरी
Udaipur Times, Rajasthan News: 2 जुलाई 2026 । राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) ने ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ESS) के साथ फर्म एवं डिस्पैचेबल नवीकरणीय ऊर्जा (FDRI) की खरीद के लिए विद्युत मंत्रालय के टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) दिशा-निर्देशों से संबंधित प्रमुख विचलनों को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस मंजूरी के साथ राजस्थान सोलरपार्क डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (RSDCL) अब बीकानेर स्थित पुगल सोलर पार्क में 2,450 मेगावाट सोलर पीवी परियोजना तथा 1,600 मेगावाट/6,400 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) के विकास हेतु प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगी।
यह परियोजना राजस्थान की बढ़ती बिजली मांग, विशेष रूप से शाम के पीक आवर्स के दौरान, बैटरी ऊर्जा भंडारण से समर्थित फर्म एवं डिस्पैचेबल नवीकरणीय बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है। सफल बोलीदाता सोलर पार्क के भीतर परियोजनाओं का विकास करेंगे तथा दीर्घकालिक विद्युत खरीद समझौते (PPA) के तहत राजस्थान के डिस्कॉम्स को बिजली की आपूर्ति करेंगे।
EREC द्वारा स्वीकृत प्रमुख विचलन
पीक आवर्स में बिजली आपूर्ति में कमी पर कड़ी पेनल्टी
अधिसूचित पीक आवर्स के दौरान बिजली आपूर्ति में कमी होने पर दंड को पीपीए टैरिफ के 1.5 गुना से बढ़ाकर 2 गुना कर दिया गया है। साथ ही, यदि पीक आवर्स की आपूर्ति में कमी रहती है, तो उसी के अनुरूप गैर-पीक अवधि में आपूर्ति की गई सौर ऊर्जा का भुगतान केवल पीपीए टैरिफ के 50 प्रतिशत की दर से किया जाएगा।
PPA समाप्ति के बाद भूमि खाली करना अनिवार्य
पीपीए की अवधि समाप्त होने के बाद डेवलपर को परियोजना की सभी परिसंपत्तियों को हटाकर सोलर पार्क में आवंटित भूमि खाली करनी होगी। हालांकि, यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से परियोजना जारी रखना चाहें और आयोग इसकी अनुमति दे, तो परियोजना का संचालन जारी रखा जा सकेगा।
अर्ली कमीशनिंग की शर्तें
परियोजना से समय से पहले बिजली आपूर्ति तभी शुरू की जा सकेगी, जब संबंधित सोलर क्षमता के साथ समानुपाती बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) भी चालू हो। ऐसी स्थिति में पीपीए के दायरे से बाहर खरीदी गई बिजली का भुगतान भी लागू पीपीए टैरिफ के अनुसार किया जाएगा।
बोली संरचना में संशोधन
सोलर पार्क के प्लॉट डिज़ाइन को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम बोली क्षमता लॉट-1 के लिए 250 मेगावाट तथा लॉट-2 के लिए 225 मेगावाट निर्धारित की गई है। इसके साथ संबंधित बीईएसएस क्षमता भी अनिवार्य होगी।
कम ऑफटेक पर मुआवजे का प्रावधान
यदि डिस्कॉम द्वारा निर्धारित बिजली का ऑफटेक कम किया जाता है, तो मुआवजे का दावा करने से पहले डेवलपर को उपलब्ध बिजली को पावर एक्सचेंज में "प्राइस टेकर" के रूप में बेचना होगा। मुआवजा वास्तविक उत्पादन (घोषित क्षमता तक) और खरीदकर्ता द्वारा निर्धारित अनुसूचित बिजली के बीच के अंतर तक ही सीमित रहेगा।
इवेंट ऑफ डिफॉल्ट प्रावधानों में बदलाव
अब परियोजना के प्रदर्शन का मूल्यांकन न्यूनतम क्षमता उपयोग कारक (CUF) के बजाय बीईएसएस के माध्यम से पीक आवर्स में बिजली आपूर्ति की बाध्यता के आधार पर किया जाएगा। यदि प्रदर्शन में कमी आती है, तो डेवलपर को उसे सुधारने के लिए अधिकतम छह माह का समय दिया जाएगा, जिसके बाद ही डिफॉल्ट संबंधी प्रावधान लागू होंगे।
5 प्रतिशत तक ग्रीन मार्केट से बिजली खरीदने की अनुमति
डेवलपर्स अपनी आपूर्ति संबंधी बाध्यताओं को पूरा करने के लिए ग्रीन मार्केट या द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से अधिकतम 5 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा खरीद सकेंगे। इस ऊर्जा का उपयोग सीधे पीक आवर्स में बिजली आपूर्ति या बीईएसएस चार्ज करने के लिए किया जा सकेगा। इसके लिए मिलने वाला मुआवजा खरीद लागत अथवा लागू पीपीए टैरिफ, दोनों में से जो कम होगा, उसी तक सीमित रहेगा।
RERC ने अपने आदेश में कहा कि यह परियोजना पारंपरिक एफडीआरई परियोजनाओं से अलग है क्योंकि इसका उद्देश्य बैटरी ऊर्जा भंडारण के माध्यम से विश्वसनीय एवं डिस्पैचेबल नवीकरणीय बिजली उपलब्ध कराना, पीक मांग को पूरा करना तथा ग्रिड की स्थिरता को मजबूत करना है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान स्वीकृति केवल बोली प्रक्रिया में प्रस्तावित विचलनों तक सीमित है। प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से खोजे गए टैरिफ को बाद में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 63 के तहत अनुमोदन के लिए अलग से आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
राजस्थान की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में महत्वपूर्ण कदम
यह मंजूरी राजस्थान में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण अवसंरचना के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इस परियोजना से ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ेगी, नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, ऊर्जा कटौती (कर्टेलमेंट) में कमी आएगी तथा राज्य के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति मिलेगी।
अब 2,450 मेगावाट सोलर क्षमता एवं 6,400 मेगावाट-घंटा बीईएसएस पर आधारित भारत के सबसे बड़े बैटरी ऊर्जा भंडारण पार्क के लिए जारी निविदा 3 अगस्त को बंद होगी। राज्य सरकार को इस मेगा परियोजना में देश की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण कंपनियों से मजबूत भागीदारी की उम्मीद है।
