राजस्थान की शान बढ़ी! तीन हस्तियों को मिला पद्मश्री 2026
Udaipur Times, Padma Shree Awards: 25 मई 2026। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार सम्मान समारोह 2026 में देश की नामचीन हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस अवसर पर राजस्थान के तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों को भी वर्ष 2026 के पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। इनमें लोक कला और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकार एवं समाजसेवी शामिल हैं। कला क्षेत्र में गफरुद्दीन मेवाती जोगी और तगाराम भील को, जबकि समाज सेवा के क्षेत्र में स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
राजस्थान के डीग निवासी गफरुद्दीन मेवाती जोगी को मेवाती लोक संगीत और पारंपरिक लोक विधाओं को संरक्षित एवं विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। वे पिछले कई दशकों से अधिक समय से भपंग वादन की परंपरा को जीवित रखने में जुटे हुए हैं। उन्हें इस लोक शैली का अनूठा कलाकार माना जाता है। भपंग के साथ-साथ वे अलगोजा, चिकारा और जोगी सारंगी सहित करीब 12 पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों में निपुण हैं। उनकी प्रस्तुतियों में मेवात की लोक संस्कृति और इतिहास की झलक दिखाई देती है।
गफरुद्दीन मेवाती जोगी ने लंदन, पेरिस, कनाडा और फ्रांस सहित कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां देकर भारतीय लोक संगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मेवाती संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किए जा चुके है।
इसी भव्य सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्वारा जैसलमेर निवासी तगाराम भील को भी लोक कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान प्रदान किया गया है। भील समुदाय से आने वाले तगाराम भील राजस्थान के प्रसिद्ध अलगोजा वादकों में शामिल हैं। उन्होंने बचपन से ही लोक संगीत को अपनी साधना बना लिया और तीन दशकों से अधिक समय से आदिवासी लोक संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
तगाराम भील अलगोजा के साथ-साथ मटका और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों में भी दक्ष हैं। उन्होंने राजस्थान डेजर्ट फेस्टिवल सहित कई प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुति दी है। उनकी कला को देश विदेश के नामचीन मंचों पर भी सराहा जा चुका है। वे स्वयं अलगोजा वाद्य तैयार करते हैं और उनके बनाए वाद्यों की मांग देश-विदेश तक रहती है। उन्होंने फ्रांस, अमेरिका, जापान, रूस और कई यूरोपीय देशों में अपनी प्रस्तुतियों और कार्यशालाओं के माध्यम से राजस्थान की आदिवासी लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाई है।
पद्म सम्मानों की इसी कड़ी में राजस्थान से तीसरी प्रमुख हस्ती श्रीगंगानगर के स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज को समाज सेवा के क्षेत्र में राष्ट्रपति द्वारा पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है। वे लंबे समय से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज कल्याण के कार्यों में सक्रिय हैं। विशेष रूप से दृष्टिबाधित और श्रवण बाधित बच्चों के लिए उनके योगदान को उल्लेखनीय माना जाता है। स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज ने श्री जगदंबा अंधविद्यालय की स्थापना की थी। यह संस्थान नेत्रहीन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास और देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराता है। इसके साथ ही यहां मूक-बधिर बच्चों के लिए विशेष विद्यालय भी संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने श्री जगदंबा धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय की स्थापना कर जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क नेत्र जांच एवं उपचार की व्यवस्था भी शुरू की। पिछले करीब दो दशक से ज्यादा समय से स्वामी ब्रह्मदेव द्वारा स्थापित चिकित्सालय लगातार सेवा कार्यों में जुटा हुआ है।
राजस्थान के इन तीनों व्यक्तित्वों को पद्म श्री सम्मान मिलने पर प्रदेशभर में खुशी की लहर है। कला, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को देशभर में सराहा जा रहा है।
