राजस्थान की बेटी ने 22 की उम्र में रचा था इतिहास, अब मिली ये बड़ी जिम्मेदारी
Udaipur Times, IAS Krishna Joshi : राजस्थान के कई युवा IAS अधिकारी देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी पहचान बना रहे हैं। कड़ी मेहनत और लगन से सफलता हासिल करके, वे युवा पीढ़ी के लिए मिसाल बन गए हैं। ऐसी ही एक युवा IAS अधिकारी हैं कृष्णा जोशी, जो आजकल चर्चा में हैं। राजस्थान के जोधपुर की रहने वाली कृष्णा ने अपनी दृढ़ता और कड़ी मेहनत से UPSC परीक्षा पास की। अब उन्हें बिहार के नालंदा जिले में एक अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। आइए, राजस्थान की इस IAS अधिकारी कृष्णा जोशी के बारे में और जानते हैं-
जोधपुर की बेटी बिहार में अपनी छाप छोड़ने को तैयार
राजस्थान के जोधपुर की रहने वाली कृष्णा जोशी ने महज 22 साल की उम्र में UPSC परीक्षा पास की। उन्होंने आत्मविश्वास, लगन और कड़ी मेहनत के दम पर कम उम्र में ही यह उपलब्धि हासिल की। IAS की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, उन्हें बिहार कैडर मिला और उन्होंने नालंदा जिले के सरफरा इलाके में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर अहम भूमिका संभाली है। अपनी पोस्टिंग के बाद कृष्णा काफी चर्चा में रही हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
पहले ही प्रयास में लक्ष्य हासिल किया
कृष्णा जोशी ने 2023 में अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास की और 73वीं रैंक हासिल की। ट्रेनिंग के बाद उन्हें बिहार कैडर मिला। उन्होंने साबित कर दिया कि सही दिशा में कड़ी मेहनत और पक्के इरादे से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें पॉलिटिकल साइंस में काफी दिलचस्पी थी; इसलिए उन्होंने UPSC परीक्षा के लिए इसे अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना और इसी विषय के साथ पहले ही प्रयास में IAS अधिकारी बनने में सफल रहीं।
कृष्णा ने युवाओं के साथ अपनी सफलता का राज साझा किया
एक इंटरव्यू में कृष्णा ने अपनी सफलता के राज बताए। उन्होंने कहा कि डायरी लिखना खुद को समझने और क्रिएटिविटी बढ़ाने का एक अहम तरीका था। इससे उन्हें बेहतर फैसले लेने और अपने विचारों को स्पष्ट करने में मदद मिली। कृष्णा जोशी का मानना है कि अगर तैयारी सही दिशा में हो, नजरिया साफ हो और आत्मविश्वास हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। कृष्णा ने बताया कि कलेक्टर बनना उनका बचपन का सपना था। बचपन में वह मज़ाक-मज़ाक में अपने नाम के आगे 'कलेक्टर' लगाती थीं।
