RBI की बड़ी कार्रवाई ! सहकारी बैंक का लाइसेंस किया रद्द, 5 बैंकों पर भी गिरी गाज
Udaipur Times, RBI Cancelled Bank's license : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्नाटक स्थित श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने बैंक की लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति, अपर्याप्त पूंजी और कमजोर आय संभावनाओं को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया है। लाइसेंस रद्द होने के साथ ही बैंक को तत्काल प्रभाव से सभी बैंकिंग गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया गया है।
RBI ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि बैंक अब अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति में जमाकर्ताओं की राशि का पूरा भुगतान करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में बैंक का संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल होता।
बैंक बंद करने और परिसमापन की प्रक्रिया शुरू
लाइसेंस रद्द करने के साथ ही RBI ने कर्नाटक के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (Registrar of Co-operative Societies) से बैंक को बंद करने और उसके परिसमापन (Winding Up) की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। इसके लिए एक लिक्विडेटर (परिसमापक) नियुक्त किया जाएगा, जो बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का निपटारा करेगा। RBI के आदेश के बाद कर्नाटक के गोकाक स्थित यह सहकारी बैंक अब कोई भी बैंकिंग गतिविधि नहीं कर सकेगा। बैंक को जमा स्वीकार करने, जमा राशि लौटाने या अन्य बैंकिंग सेवाएं देने से रोक दिया गया है।
इन बैंकों पर लगाया गया जुर्माना
महाराष्ट्र के हिंगणघाट स्थित वर्धा जिला आशीर्वाद महिला नगरी सहकारी बैंक मर्यादित पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बैंक पर आरोप है कि उसने कुछ एडवांस (लोन) पर तय नियामकीय सीमा का पालन नहीं किया।
द नासिक रोड देवलाली व्यापारी सहकारी बैंक लिमिटेड पर सबसे अधिक 2 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए, जो नियमों के खिलाफ है।
नवापुर मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (नंदुरबार, महाराष्ट्र) पर 10,000 रुपये की पेनल्टी लगी है। बैंक ने निरीक्षण के दौरान RBI के अधिकारियों द्वारा मांगी गई जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
सर्वोदय कमर्शियल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (गुजरात) पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक पर इन-ऑपरेटिव खातों में न्यूनतम बैलेंस नियमों का पालन न करने और गलत चार्ज लगाने का आरोप है।
चित्रदुर्ग जिला सहकारी केंद्रीय बैंक लिमिटेड (कर्नाटक) पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने निदेशकों से जुड़े लोन स्वीकृत किए और कई ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड समय पर सेंट्रल KYC रिकॉर्ड रजिस्ट्री में अपलोड नहीं किए।
क्यों रद्द किया गया लाइसेंस?
RBI के अनुसार बैंक कई महत्वपूर्ण नियामकीय मानकों को पूरा करने में विफल रहे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं है। भविष्य में आय अर्जित करने की संभावनाएं कमजोर हैं। बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के कुछ प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया जा रहा था। बैंकों की वित्तीय स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी थी कि वह जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा नहीं कर सकता था। RBI ने स्पष्ट किया कि यदि बैंकों को आगे संचालन की अनुमति दी जाती तो इससे जमाकर्ताओं के हितों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था।
जमाकर्ताओं के लिए राहत की खबर
हालांकि बैंक का लाइसेंस रद्द होने से ग्राहकों में चिंता बढ़ सकती है, लेकिन अधिकांश जमाकर्ताओं के लिए राहत की खबर भी है। RBI के मुताबिक बैंक के लगभग 97.9 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी। यह भुगतान जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (DICGC) के माध्यम से किया जाएगा। DICGC के नियमों के तहत प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर बीमा सुरक्षा प्राप्त होती है।
क्या होता है DICGC?
DICGC भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है, जो बैंकों में जमा रकम का बीमा प्रदान करती है। किसी बैंक के बंद होने या लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में पात्र जमाकर्ताओं को बीमित सीमा तक उनकी राशि वापस दिलाने की जिम्मेदारी DICGC की होती है। इसी व्यवस्था के कारण बैंक के अधिकांश ग्राहकों को अपनी जमा राशि को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं होगी।
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र पर नजर
हाल के वर्षों में RBI ने वित्तीय रूप से कमजोर सहकारी बैंकों पर निगरानी बढ़ाई है। जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा और बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक समय-समय पर ऐसे संस्थानों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई करता रहा है। श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक के खिलाफ की गई यह कार्रवाई भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने का संदेश गया है।
