RBI का नया नियम लागू ! अब मिलेंगे 25000 रुपये, जाने क्या रहेगी जरूरी शर्तें ?

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RBI का नया नियम लागू ! अब मिलेंगे 25000 रुपये, जाने क्या रहेगी जरूरी शर्तें ? 

Udaipur Times, New RBI Rule 25,000 Rupees: अगर आप ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, यूपीआई स्कैम या फर्जी डिजिटल ट्रांजैक्शन का शिकार हो जाते हैं, तो जल्द ही आपको बैंक से आंशिक मुआवजा मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी के पीड़ितों को राहत देने के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। इसके तहत छोटे मूल्य के ऑनलाइन फ्रॉड के पीड़ितों को अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा गया है।

किसे मिलेगा मुआवजा?

आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार, जिन ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी में 50,000 रुपये  तक का नुकसान हुआ है, वे इस योजना के तहत मुआवजे के पात्र हो सकते हैं। पीड़ित को उसके नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये जो भी कम हो, मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। 

साधारण शब्दों में कहें तो, इसमें आज आप जितने भी प्रकार के डिजिटल भुगतान करते हैं, वे सभी शामिल हैं, जैसे यूपीआई ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान, चाहे वे कार्ड स्वाइप या टैप करके किए गए हों या कार्ड की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करके किए गए हों। यदि आपने डिजिटल माध्यम से पैसे का लेन-देन किया है, तो इसे इस कैटेगरी में रखा जाएगा।

क्या हैं जरूरी शर्तें?

मुआवजा पाने के लिए कुछ अहम शर्तों को पूरा करना होगा—

धोखाधड़ी की जानकारी बैंक को देनी होगी।

शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी दर्ज करनी होगी।

यह रिपोर्टिंग फ्रॉड होने के पांच दिनों के भीतर करनी होगी।

अगर ग्राहक तय समय के भीतर शिकायत दर्ज नहीं करता है, तो वह इस मुआवजा योजना का लाभ नहीं उठा सकेगा।

कब से लागू होंगे नए नियम?

आरबीआई ने इस योजना को लागू करने की तारीख छह महीने आगे बढ़ा दी है। अब यह नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होने की संभावना है और इसके बाद होने वाले डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड पर यह नियम लागू होंगे।
बैंक और RBI कैसे बांटेंगे मुआवजे का बोझ?

प्रस्ताव के मुताबिक, मुआवजे की राशि में आरबीआई, ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक मिलकर योगदान देंगे। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली में ग्राहकों का भरोसा बढ़ाना और ऑनलाइन धोखाधड़ी के पीड़ितों को त्वरित राहत देना है।

क्यों जरूरी है यह कदम?

देश में यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही साइबर फ्रॉड के मामलों में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में आरबीआई का यह कदम डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाने और ग्राहकों को आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

अगर फ्रॉड हो जाए तो तुरंत क्या करें?

तुरंत अपने बैंक को सूचना दें।

हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर शिकायत दर्ज कराने से न सिर्फ पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ती है, बल्कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज होती है।

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