रिश्तेदारों और समाज ने ताने मारकर उड़ाया मजाक ! 10 सालों तक बिस्तर पर रहने के बाद CMO ऑफिसर बन दिया करारा जवाब

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रिश्तेदारों और समाज ने ताने मारकर उड़ाया मजाक !  10 सालों तक बिस्तर पर रहने के बाद CMO ऑफिसर बन दिया करारा जवाब  

Udaipur Times, Mini Agarwal, MPPSC Topper: हम थोड़ी सी मुश्किलों से हार जाते हैं जरा सी जीवन में परेशानियां नहीं आयीं कि हार मान लेते हैं, अपना आत्मविश्वास कम करने लगते हैं। लेकिन आज हम आपको उस लड़की के बारें में बताने जा रहे हैं जो शारीरिक चुनौतियों के साथ पैदा हुई थी समाज ने उसे बोझ समझा। यहां तक कि रिश्तेदारों ने भी उन्हें सड़कों पर भीख मांगने के लिए छोड़ देने की सलाह दी थी। लेकिन इस लड़की ने हार नहीं मानी एक अधिकारी बनकर उन्होंने सबकी बोलती बंद कर दी। 

सालों तक बिस्तर पर रहने और कई सर्जरी का दर्द सहने के बावजूद, मिनी ने शिक्षा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। 16 साल की कड़ी मेहनत के बाद, उन्होंने MPPSC परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल किया और अभी वह मध्य प्रदेश में चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर (CMO) के तौर पर काम कर रही हैं।

रिश्तेदारों और समाज ने ताने मारकर उड़ाया मजाक !

10 सालों तक बिस्तर पर पड़ी रहीं

मिनी अग्रवाल जन्म से ही शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रही थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने ज़िक्र किया कि कैसे वे दस साल तक बिस्तर पर ही रहीं, जिससे उनका शरीर बहुत कमज़ोर हो गया था। उनकी सेहत से जुड़ी परेशानियां बढ़ती ही गईं। उनके लिए पढ़ाई करना एक बड़ी चुनौती थी। किताबों के साथ-साथ उन्हें दर्द से भी लड़ना पड़ता था। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, अपनी पढ़ाई में आई कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने लेटे-लेटे और बैठकर पढ़ाई करना शुरू किया।

ऐसी लड़की को तो सड़क पर भीख मांगने के लिए छोड़ देना चाहिए

पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें अपनी ज़िंदगी का मकसद समझ आया और वे अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ना चाहती थीं। लेकिन, उनके प्रति समाज का नज़रिया बहुत अलग था। कई लोगों और रिश्तेदारों का कहना था कि उनके जैसी लड़की को तो सड़क पर भीख मांगने के लिए छोड़ देना चाहिए। बचपन में भी उन्हें न सिर्फ़ शारीरिक तकलीफ़ झेलनी पड़ी, बल्कि स्कूल और रिश्तेदारों से अपमान और ताने भी सुनने पड़े।

रिश्तेदारों और समाज ने ताने मारकर उड़ाया मजाक !

11 साल की उम्र में 11 घंटे लंबी सर्जरी हुई

मिनी की पहली 11 घंटे लंबी सर्जरी 11 साल की उम्र में हुई थी। इसके बाद, वह अगले 10 सालों तक पूरी तरह बिस्तर पर ही रही। इस दौरान उसकी चार और सर्जरी हुईं, फिर भी शारीरिक दर्द और तकलीफों के बावजूद उसने हार नहीं मानी। उसने कभी अपने परिवार को रोते हुए नहीं देखा, हालांकि वह अकेले में रोती थी। उन मुश्किल हालात में भी, उसने कभी अपना आत्मविश्वास और कुछ बड़ा हासिल करने का जज़्बा नहीं खोया।

2012 में MPPSC की परीक्षा की तैयारी शुरू की

स्थानीय कलेक्टर के काम से प्रेरित होकर, मिनी ने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया। उसने 2012 में मध्य प्रदेश सिविल सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की। यह सफ़र बिल्कुल भी आसान नहीं था; उसे कई बार प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाएं देनी पड़ीं और इंटरव्यू के दौरान भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, हार मानने के बजाय, उसने लगातार अपनी तैयारी को बेहतर बनाया। उसका मकसद समाज की नज़र में खुद को साबित करना था।

'दिव्यांगजन' श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त कर बनीं CMO

16 साल के कठिन संघर्ष और लगातार कोशिशों के बाद, मिनी अग्रवाल ने 2018 में MPPSC परीक्षा में सफलता हासिल की। ​​उन्होंने 'दिव्यांगजन' (Persons with Disabilities) श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त कर टॉप किया और चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर (CMO) बनीं। उनकी सफलता की कहानी यह दिखाती है कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए अटूट संकल्प के साथ आगे बढ़ना ज़रूरी है। जिस समाज ने कभी उन्हें नकारा और ताने मारे थे, वही समाज अब हज़ारों लोगों को उनके साहस से प्रेरणा लेते हुए और अपने लक्ष्यों को पाने की कोशिश करते हुए देखता है।

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