दुःख की घड़ी में इंसानियत को सलाम, जाते-जाते 2 बच्चों की जिंदगी रोशन कर गई डेढ़ साल की आस्था
Udaipur Times , Haryana news : हरियाणा के महम से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर हर किसी का ह्रदय पसीज रहा है और खास बात यह है कि सुनने वाले जी भरकर तारीफ भी कर रहे हैं। यहां महज़ डेढ़ साल की एक बच्ची समय से पहले अलविदा होकर पूरे परिवार को गमगीन कर गई लेकिन दुःख की इस घड़ी में उस बेटी के माता-पिता ने एक ऐसा साहसिक फैसला लिया जिसे चौगरदे को सराहना मिल रही है।
नेत्रदान महादान का लिया फैसला
महम के वार्ड नंबर-6 निवासी दीपक परूथी और उनकी पत्नी रीना ने बताया कि हमारी डेढ़ साल की बेटी आस्था दो दिन से तेज बुखार से पीड़ित थी। बुखार के दौरान उसे उल्टियां हुई जिससे उसकी मौत हो गई। नन्ही सी बिटिया का इस तरह समय से पहले छोड़कर चले जाना हमें झकझोर कर रख गया लेकिन दुःख की इस घड़ी के बीच हमने डाक्टरों से संपर्क कर नेत्रदान की इच्छा जताई।
उन्होंने बताया कि भले ही उनकी बिटिया उनके बीच नहीं रही लेकिन उसकी आंखों से किसी दूसरे बच्चे को दुनिया देखने का अवसर मिल सके तो यह उनके लिए बड़ी सांत्वना होगी। ऐसे में इस नेत्रदान से दो अन्य बच्चों की जिंदगी रोशन होने की उम्मीद जगी है।
डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा है परिवार
दीपक का परिवार डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा हुआ है। डेरा अनुयायी रामदास इंसा ने बताया कि संस्था लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करती है और इसी पहल का अनुसरण करते हुए दिवंगत बेटी आस्था के माता-पिता ने भी उनकी आंखें दान करने का साहसिक फैसला लिया। परिवार की इस पहल से जरूरतमंद बच्चों की आंखों में फिर से रोशनी लौट सकेगी। उन्होंने बताया कि डेरा सच्चा सौदा शुरू से ही लोगों को नेत्रदान और देहदान के लिए प्रेरित करता आया है। मानवता की भलाई के लिए डेरा सच्चा सौदा हमेशा सार्थक प्रयास करता आया है और इस दिशा में निरंतर नए कार्य किए जा रहे हैं।