अंधकार के कफस में उम्मीद सी आई, जब बडे मोहज्जब से उसने हर बात समझायी..
वो शिक्षक ही था, जिसने हर पथ पर मेरे रोशनी जलायी…
मुझे जम्हूऱियत थी हर बात की पर सलीका-ए-ढंग नही,
फिर कुछ यूँ हुआ कि लिहाज, इक्खितयार, एहितराम और रिफाकत से मेरी दोस्ती करायी…
वो शिक्षक ही था, जिसने हर पथ पर मेरे रोशनी जलायी…
मेरा रहनुमा रहा, मेरे साथ खडा रहा और मेरे कांधे पे हाथ रख के मुझे राह दिखलाई…
वो शिक्षक ही था, जिसने हर पथ पर मेरे रोशनी जलायी…
Contributed by: Garima Sharma
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