पर्युषण पर्व की समाप्ति पर संवत्सरी पर्व मनाया


पर्युषण पर्व की समाप्ति पर संवत्सरी पर्व मनाया

आचार्य शिवमुनि महाराज के सानिध्य में संम्वत्सरी महापर्व मनाया गया। महाप्रज्ञ विहार में इस महापर्व को मनाने के लिए हजा

 

पर्युषण पर्व की समाप्ति पर संवत्सरी पर्व मनाया

आचार्य शिवमुनि महाराज के सानिध्य में संम्वत्सरी महापर्व मनाया गया। महाप्रज्ञ विहार में इस महापर्व को मनाने के लिए हजारों की संख्या में श्रावक- श्राविकाएं उपस्थित हुए। समारोह में गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया एवं कांग्रेस के पूर्व रघुवीर मीणा भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

धर्मसभा में आचार्यश्री शिवमुनि महाराज ने कहा कि महासंवत्सरी पर्व बहुत महत्व का दिन होता है। यह क्षमा याचना एवं जीव दया का दिन है। वर्ष भर आपसे जाने अनजाने में जो भी भूलें या गलतियां हुई है उन पर आत्मचिन्तन करने दिन है। यह वर्ष भर आपके द्वारा जाने अनजाने में किये गये कर्मों का हिसाब- किताब देखने का दिन है। यह विश्व मैत्री दिवस है। आत्म निरीक्षण, आत्म परीक्षण ओर आत्मसम्मान का दिन है। अपनी अन्तरआत्मा को जानो, पहचानो और आत्मावलोकन करो। आज हम सभी को एक दूसरे के अपनी प्रति दृष्टि बदलने का दिन हैं। सभी के प्रति मैत्री भाव प्रकट करने का दिन है और यही धर्म का सार है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से आग को आग नहीं बुझा सकती उसके लिए पानी की जरूरत होती है, हिंसा को हिंसा नहीं रोक सकती उसके लिए अहिंसा की जरूरत होती है उसी तरह से कटुता, वैमनस्याता, क्रोध, आवेश के वशीभूत बनी हुई दुश्मनी को रोकने और वैर भाव को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए क्षमा याचना की जरूरत होती है। आज सभी अपना-अपना आत्मनिरीक्षण करके बिना किसी भेदभाव के एक दूसरे के प्रति आई कटुता को खत्म करके मैत्री भाव अपनाएं। यही संवत्सरी महापर्व का सन्देश है। यह जीव दया के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना भी सीखाता है, इसलिए अपनी कमाई में से कुछ अंश जीव दया के लिए भी निकालो, यह हमारा कर्तव्य है। आचार्यश्री ने भी स्वयं की ओर सभी श्रावकों के समक्ष उनकी ओर से कभी कठोरता हुई तो क्षमायाचना की।

युवाचार्यश्री महेन्द्र ऋषि ने कहा कि संवत्सरी पर्व जैन आराधना, साधना का सर्वोच्च पर्व है। बरसात के 50 दिनों बाद जो बंजर जमीन थी वह कैसे लहलहाती है। चारों और हरियाली और खुशहाली का माहौल होता है। ठीक उसी तरह पर्यूषण समाप्ति के बाद संवत्सरी महापर्व भी एक दूसरे को आल्हादित और मैत्री भाव पैदा करने का दिन है। जिस तरह से बरसात के 50 दिनों बाद बंजर भूमि पर भी चारों और हरियाली छा जाती है, ठीक उसी तरह से संवत्सरी पर्व से भी हर व्यक्ति सभी तरह की कटुता को समाप्त कर मैत्री की हरियाली से अपना जीवन शुरू करे। युवाचार्यश्री ने भी सभी सन्तों- भगवन्तों और श्रावकों के समक्ष अपनी क्षमायाचना के भाव प्रकट किये।

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गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया ने इस अवसर पर सन्त- भगवन्तों, श्रावक- श्राविकाओं एवं नगर की आम जनता से क्षमा याचना करते हुए कहा कि वह राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं। उनका कार्य क्षेत्र ही ऐसा है कि सभी को सन्तुष्ट कर पाना मुश्किल होता है। वर्ष भर में उनकी वजह से किसी का भी दिल दुखा हो या किसी को भी उनके द्वारा कोई कटुवचन कह दिया हो तो वह क्षमा याचना करते हैं।

पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने भी कहा कि वह भी राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं। उनके द्वारा भी कभी नगर वासियों को कटु वचन कहे गये हो तो वह भी क्षमायाचना करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे भी जैन स्कूलों में ही पढ़े हैं। उनमें जैनत्व के संस्कार ही है। हम सभी भगवान महावीर के उपदेशों अहिंसा परमोधर्म का ही पालन करते हैं।

चातुर्मास संयोजक विरेन्द्र डांगी, औंकरलाल सिरोया, संजय भण्डारी, रजनी डांगी आदि ने भी बारी- बारी से सभी से क्षमा याचना कर अपने- अपने विचार रखे।

शहर में पशु- पक्षियों के लिए 10 स्थान करें चिन्हित

जीव दया के बारे में बोलते हुए कटारिया ने कहा उनकी सरकार और वे स्वयं जीव दया के बारे में काफी गम्भीर हैं। गायों के लिए गौशालाएं तो बनवाते ही हैं पहली बार हमने नर पशु के लिए भी नर गौशाला बनवाने का भी निर्णय लिया है। जिस तरह से गौशालाओं के लिए सरकार अनुदान देती है उसी तरह नर पशु गौशालाओं के लिए सरकार 6 माह का अनुदान देगी। उसके निर्माण के लिए 50 लाख रूपए भी देगी।

उन्होंने श्रीसंघ से शहर में 10 ऐसे स्थान चिन्हित करने को कहा जहां पर पशु-पक्षियों के लिए आहार- पानी की व्यवस्था की जा सके। स्थान आप उपलब्ध करवा देंगे तो वहां पर निर्माण सरकार करवा देगी। उनके आहर-पानी की व्यवस्था भी आपको ही करनी पड़ेगी। कटारिया की बात का आचार्यश्री शिवमुनिजी ने अनुमोदना करते हुए श्री संघसे इस कार्य के लिए तुरन्त कमेटी बना कर इसे मूर्त रूप देने का आदेश दिया।

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