शादी के बाद बदली सीमा की जिंदगी ! 48 किलो वजन घटाया, अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता गोल्ड
Udaipur Times, Haryana News, रोहतक : शादी के बाद पति से मिली प्रेरणा, खान-पान में बदलाव और बेहतर जीवनशैली ने मॉडल टाउन निवासी सीमा वर्मा की जिंदगी बदल दी। कभी बढ़े हुए वजन से जूझ रहीं सीमा ने खेल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और महज दो वर्षों में 48 किलो वजन कम कर लिया। इसके बाद केटलबेल खेल को जुनून बना लिया। अब दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में चल रही आईयूकेएल केटलबेल स्पोर्ट वर्ल्ड गेम्स-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए सीमा ने स्वर्ण पदक जीतकर शहर का नाम रोशन किया है।
16 किलो की केटलबेल 196 बार उठाई
सीमा वर्मा ने 4 से 9 अक्टूबर तक आयोजित विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में 68 प्लस किलोग्राम भार वर्ग और 35 से 39 वर्ष की वेटरन महिला श्रेणी में हिस्सा लिया। उन्होंने 16 किलोग्राम की केटलबेल को 196 बार उठाकर स्नैच-12 स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें स्वर्ण पदक और उपलब्धि प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
कांस्य से शुरू हुआ सफर, अब विश्व चैंपियन
सीमा का केटलबेल में सफर भी प्रेरणादायक रहा है। इससे पहले उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक जीता था। इस उपलब्धि के बाद उन्होंने अभ्यास और प्रशिक्षण को और अधिक गंभीरता से लिया। लगातार मेहनत का परिणाम अब स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है।
गृहस्थी संभाली, फिर भी नहीं छोड़ा अभ्यास
शादी के बाद सीमा ने पति नितिन वर्मा से प्रेरणा लेकर अपनी जीवनशैली बदली। खान-पान पर नियंत्रण के साथ नियमित व्यायाम और प्रशिक्षण शुरू किया। दो वर्षों में 48 किलो वजन कम करने के बाद केटलबेल खेल के प्रति उनका जुनून बढ़ता गया। परिवार और गृहस्थी की जिम्मेदारियां निभाने के साथ उन्होंने नियमित अभ्यास जारी रखा और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
सीमा की उपलब्धि उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो परिवार की जिम्मेदारियों के चलते अपनी फिटनेस और खेल प्रतिभा को पीछे छोड़ देती हैं। सीमा ने साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नियमित अभ्यास और परिवार के सहयोग से गृहस्थी संभालते हुए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
बॉक्स : खेल युवाओं को नशे से दूर रखने का जरिया
सीमा के पति नितिन वर्मा ने कहा कि खेल युवाओं को नशे की लत से दूर रखने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। युवाओं को खाली समय मोबाइल और नशे की ओर लगाने के बजाय खेलों से जोड़ने की जरूरत है। नियमित खेल गतिविधियों से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की भावना भी विकसित होती है। उन्होंने कहा कि परिवारों को बच्चों और युवाओं को खेलों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि वे स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगा सकें।