हौम्योपैथिक यूटिलिटि ऑफ माइंड सिम्पटमस पर सेमीनार
होम्योपैथिक में सबसे पहले रोगी को समझ कर फिर रोग की जड़ तलाशी जाती है। होम्योपैथ मानता है कि मन में उठने वाले विचार रोगी उसके स्वभाव व भावनाओं के कारण ही रोगी की उत्पति होती है। इसलिये इस पद्विति में सबसे पहले रोगी की भावनाओं व उसके स्वभाव व प्रकृति व उसके दिमाग में उठने वाले विचारो पर नियत्रंण का प्रयास किया जाता है।

होम्योपैथिक में सबसे पहले रोगी को समझ कर फिर रोग की जड़ तलाशी जाती है। होम्योपैथ मानता है कि मन में उठने वाले विचार रोगी उसके स्वभाव व भावनाओं के कारण ही रोगी की उत्पति होती है। इसलिये इस पद्विति में सबसे पहले रोगी की भावनाओं व उसके स्वभाव व प्रकृति व उसके दिमाग में उठने वाले विचारो पर नियत्रंण का प्रयास किया जाता है।
अधिकाश की बीमारीयो की जननी विकृत विचार ही होते है जो पहले मन एव विचार को प्रभावित करते है। व उनका धीरे धीरे शरीर पर प्रभाव पड़ता हे।यह कहना है कि डा संजीव सहगल का सचिव एसएसआरएच इन्टरनेशनल हौम्यापैथ का अवसर था रविवार को प्रतापनगर स्थित आर्इ्रटी सभागार में जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ वि.वि. के सगठंक हौम्योपैथिक चिक्तिसा महाविद्यालय द्वारा युटीलिटी ऑफ मांइड सिम्प्टमस पर आयोजित पर एक दिवसीय सेमीनार का ।
उन्होने कहा कि होम्योपैथिक में सभी गंभीर बिमारीयो का इलाज किया जा सकता है और होम्योैपैथिक के प्रति लोगो का दिनप्रतिदिन विश्वास बढ़ रहा है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि छात्र शोध कार्यो में ग्रामीण क्षेत्रों को आधार बनाते हुए कमन्यूटी सेवा से जुड़ का कार्य करे। अपने अध्ययन के साथ साथ समाज सेवा से भी जुडे। मुख्य अथिति भिलवाड़ा सेशन जज रामसिंह झाला थे। विश्ष्ठि अथिति अधिष्ठाता अरूण पानेरी और वरिष्ठ पत्रकार उग्रसेन राव थे।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में निदेशक डॉ. अमिया नन्दा गोस्वामी ने सभी का परिचय दिया धन्यवाद डॉ राजन सुद द्वारा दिया गया इस अवसर पर होम्योपेथिक चिकित्सों के द्वारा पूछे गये प्रशनो के उत्तर डॉ. सजीव सहगल ने दिये।
डॉ. नवीन विश्नोई, डॉ लिलि जैन, डॉ बबिता रश्दि एवं डॉ निवेदिता व अजिता रानी सहित होम्योपैथिक छात्र व छात्राऐ उपस्थित थै।
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