गीत-संगीत से सराबोर हुए वरिष्ठ नागरिक

वरिष्ठ नागरिक क्लब मुस्कान की ओर से वरिष्ठ नागरिकों के लिये संगीत संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें संगीत प्रेमियों ने मधुर स्वरों में फिल्मी गीतों को अपनी आवाज देकर माहौल में समां बांध दिया।

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गीत-संगीत से सराबोर हुए वरिष्ठ नागरिक

वरिष्ठ नागरिक क्लब मुस्कान की ओर से वरिष्ठ नागरिकों के लिये संगीत संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें संगीत प्रेमियों ने मधुर स्वरों में फिल्मी गीतों को अपनी आवाज देकर माहौल में समां बांध दिया।

श्रद्धा गट्टानी व शोर्य ने युगल स्वरों में ‘ओ हसीना जुल्फों वाली जानें जहाँ …‘,‘बड़ अच्छे लगते है…‘ शोर्य ने ‘तेरा मुझसे है पहले नाता कोई…‘, गायक फैय्याज खां ने फिल्म बेजू बावरा का गीत मांग पर सुनाया। इस अवसर पर उन्होंने गज़ल ‘दिलजंला के मुस्कराते है,वो आपनी आदत कब बाज आते है…‘,‘हम तेरे शहर में आये है मुसाफिर की तरह,सिर्फ एक बार मुलाकात का दें दे…‘, इस अवसर पर कौशल्या गट्टानी ने ‘‘दुनिया में आये है तो जीना पड़ेगा,जीवन है अगर तो जहर पीना ही पड़ेगा..‘ भजन गाया तो सभी उसी में खो गये।

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शोर्य ने ‘ऐ जिन्दगी लगा ले….‘,‘ये शाम मस्तानी,मदहोश किये जा..‘, ‘तुझे सब पता है मेरी मां…‘,श्रद्धा गट्टानी ने ‘वो दिल कहां से लाउं तेरी याद जो भुला दें…‘,‘अहसान तेरा होगा मुझ पर,दिल चाहता है तो कहनें दो..‘,‘तुम आयें तो आया मुझे याद गली में आज चाँद निकला…‘,‘मेरे हम सफर,मेरे पास आ, मेरे पास आ…‘,‘सुना रहा है ये समां सुनी सुनी सी दास्तां…‘, श्रद्धा व शोर्य ने युगल स्वर में ‘जब कोई बात बिगड़ जाय जब कोई मुश्किल में पड़ जाये तुम देना साथ मेरा,ओ हम नवाज….‘,श्रद्धा गट्टानी ने राजस्थानी गीत ‘मारो हैलो सुणो जी रामा पीर..‘ को अपनी आवाज दी तो सभी ने मुक्तकंठ से सराहना करते हुए तालियों की भरपूर दाद दी।

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