Udaipur Times, IAS Shakti Dubey : आईएएस शक्ति दुबे का सफ़र बहुत शानदार रहा है, जो UPSC परीक्षा में पहली रैंक हासिल करने के साथ सफल हुआ। एक साधारण परिवार से आने वाली शक्ति दुबे ने लगातार चुनौतियों का सामना करते हुए देश की सबसे कठिन परीक्षा में टॉप किया।
कौन हैं IAS शक्ति दुबे?
28 दिसंबर 1996 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में, UP पुलिस में सब-इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार दुबे के परिवार में एक बच्ची का जन्म हुआ। उनका नाम शक्ति दुबे रखा गया। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गृहनगर प्रयागराज में पूरी की। शुरू से ही एक बेहतरीन छात्रा रहीं शक्ति ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने बायोकेमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से उसी विषय में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।
परिवार से मिली सिविल सेवा की प्रेरणा
शक्ति ने अपने पिता को अपनी ड्यूटी निभाते और लोगों की मदद करते देखा। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि सरकारी सेवा सिर्फ़ एक नौकरी नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में बदलाव लाने का एक ज़रिया है। एक इंटरव्यू में शक्ति ने बताया कि BHU हॉस्टल में रहते हुए उन्हें एहसास हुआ कि पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था कैसे जनता के बीच सुरक्षा की भावना पैदा कर सकती है।
2018 में UPSC का रास्ता चुना
पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद, शक्ति ने UPSC की तैयारी पर ध्यान देना शुरू किया। सिविल सेवा की ओर उनका सफ़र 2018 में शुरू हुआ। UPSC परीक्षा पास करने के लिए सिर्फ़ किताबें पढ़ना काफ़ी नहीं है; सिलेबस को समझना, करंट अफेयर्स से अपडेट रहना, बार-बार रिवीजन करना और परीक्षा के दौरान अपने ज्ञान को प्रभावी ढंग से पेश करना ज़रूरी है।
UPSC मेन्स: पॉलिटिकल साइंस
हालांकि शक्ति का एकेडमिक बैकग्राउंड साइंस का था, लेकिन उन्होंने UPSC मेन्स परीक्षा के लिए पॉलिटिकल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशंस (PSIR) को अपने ऑप्शनल विषय के तौर पर चुना। शक्ति दुबे बताती हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि उम्मीदवार वही विषय चुने जो उसने कॉलेज में पढ़ा हो। विषय में रुचि, उसे समझने की क्षमता और लंबे समय तक उसे गहराई से पढ़ने की इच्छा ही असल में मायने रखती है।
मुश्किलों के बावजूद उम्मीद नहीं छोड़ी
शक्ति दुबे कहती हैं कि UPSC परीक्षा की तैयारी कोई ऐसा काम नहीं है जो एक दिन में पूरा हो जाए। इस प्रक्रिया में कई चरण होते हैं, और हर चरण की अपनी अलग चुनौतियां होती हैं। उन्हें भी अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए एक से ज़्यादा बार कोशिश करनी पड़ी। भले ही शुरुआती नतीजे उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा।
पांचवीं कोशिश में देश में टॉप रैंक हासिल की
शक्ति दुबे ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की। परीक्षा के अंतिम नतीजे 22 अप्रैल, 2025 को घोषित किए गए। उनकी यह कामयाबी उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो लंबे समय से सिविल सेवा में शामिल होने का सपना देख रहे हैं। कई कोशिशों के बाद देश में टॉप रैंक हासिल करना कोई छोटी बात नहीं है।
शक्ति दुबे की कहानी दिखाती है कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती; इसके लिए लगातार कड़ी मेहनत, धैर्य और अनुशासन की ज़रूरत होती है। इसी तरह, नवरात्रि के दौरान देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा हमें तपस्या, समर्पित अभ्यास और अपने लक्ष्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का महत्व सिखाती है।