शाम-ए-सूफी संगीत संध्या आयोजित बहीं सुर सरिता

रोटरी क्लब उदयपुर द्वारा आज रोटरी बजाज भवन में शाम-ए-सूफी संगीत संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें सूफी गायक डाॅ. राकेश माथुर द्वारा पेश किये गये सूफियाना कलाम ने कार्यक्रम में समां बांध लिया।

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शाम-ए-सूफी संगीत संध्या आयोजित बहीं सुर सरिता

उदयपुर। रोटरी क्लब उदयपुर द्वारा आज रोटरी बजाज भवन में शाम-ए-सूफी संगीत संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें सूफी गायक डाॅ. राकेश माथुर द्वारा पेश किये गये सूफियाना कलाम ने कार्यक्रम में समां बांध लिया।

माथुर ने अपने कार्यक्रम की शुरूआत सुबह गाये जाने वाले शबद कीर्तन से की। इसके बाद उन्होंने ‘जिसका कोई नहीं उसका उपर वाला है…‘, ‘आगे बैठो दरवाजा खुला है…‘, ‘सांसो की माला पे सिमरू इनका नाम…‘ भजन पेश किया तो दर्शक उस झूम उठें। सभी ने भजन की प्रत्येक लाईन पर तालियां बजा कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इसके बाद उन्होंने ‘प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप…‘,‘सुहानी चांदनी रातें,हमें सोने नहीं देती…‘,‘ये जो हलका-हलका सुरूर है,सब तेरी नज़र का कसूर है….‘, ‘अपने कदमों में पड़ा रहने दो अपने दवानें को….‘, ‘तू मानें या ना मानें दिल दारा…‘, ‘तुझ बिन जीना भी क्या जीना….‘, ‘ए री सखी मंगल गीत गाओं री…‘, ‘मेरे रश्के कमर,तूने पहली नज़र, जब से मिलायी मज़ा आ गया…‘ को प्रस्तुत किया, तो दर्शकों ने हर पंक्ति का आनन्द उठाया।

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इस अवसर पर डाॅ. माथुर ने जब शेर ‘मरने के बाद याद ना रहा कोई, मेर कब्र से मिट्टी उठा ले रहा कोई, ए खुदा देा पल की जिदंगी दे दें, मेरी कब्र से उदास जा रहा कोई…‘ पेश किया तो दर्शकों ने तालियों की भरपूर दाद दे कर शेर की वाहवाही की। डाॅ. माथुर ने कहा कि सूफी का अर्थ साफ, निश्चल,स्वच्छ जिसे आर-पार देखा जा सकता है। सूफी होना बहुत बड़़ी बात है,सूफी का अनुसरण किया जा सकता है।

प्रारम्भ में क्लब अध्यक्ष डाॅ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि प्रेम जब सुफियाना हो जाता है तो अश्रुधारा निकल पड़ती है और अन्दर से निकलने वाला सूफी संगीत होता है। कार्यक्रम में डाॅ. माथुर के संगीत गुरू उस्ताद मोहम्मद फैय्याज खां, ललित नारायण माथुर सहित अनेक अतिथि मौजूद थे। अंत में सचिव संजय भटनागर ने आभार ज्ञापित किया।

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