शिल्पग्राम उत्सव: आखिरी दिन उमड़ा शहर

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित राष्ट्रीय हस्त शिल्प एवं लोक कला उत्सव ‘‘शिल्पग्राम उत्सव’’ लोक कलाओं की धमाकेदार प्रस्तुतियों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की समवेत ध्वनि की अनुगूंज के साथ रविवार को सम्पन्न हुआ। आखिरी दिन ऐसा लगा मानो पूरा शहर शिल्पग्राम में उमड़ पड़ा और आखिरी दिन शिल्पग्राम में आये लोक कलाकारों और शिल्पकारों की एक झलक पाने के इस साल के अंतिम अवसर को खोना नहीं चाहते। समूचा शिल्पग्राम परिसर में लोगों की भारी भीड़ रही तथा शिल्पग्राम के विभिन्न बाजारों के रास्ते पर लोगों को धीरे धीरे सम्भल कर चलना पड़ा।

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शिल्पग्राम उत्सव: आखिरी दिन उमड़ा शहर

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित राष्ट्रीय हस्त शिल्प एवं लोक कला उत्सव ‘‘शिल्पग्राम उत्सव’’ लोक कलाओं की धमाकेदार प्रस्तुतियों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की समवेत ध्वनि की अनुगूंज के साथ रविवार को सम्पन्न हुआ। आखिरी दिन ऐसा लगा मानो पूरा शहर शिल्पग्राम में उमड़ पड़ा और आखिरी दिन शिल्पग्राम में आये लोक कलाकारों और शिल्पकारों की एक झलक पाने के इस साल के अंतिम अवसर को खोना नहीं चाहते। समूचा शिल्पग्राम परिसर में लोगों की भारी भीड़ रही तथा शिल्पग्राम के विभिन्न बाजारों के रास्ते पर लोगों को धीरे धीरे सम्भल कर चलना पड़ा।

लोक कला और शिल्प कला को जन-जन तक पहुंचाने तथा कलाओं के माध्यम से ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ की भावना का विस्तार करने के ध्येय से आयोजित इस उत्सव में पिछले दस दिनों से लागातार 9 घंटे तक लोक परंपराओं का प्रदर्शन करने वाले लोक कलाकार और शिल्पकारोें ने रविवार शाम रंगमंच से अपने वाद्यों की धमक और अपनी अलमस्त थिरकन से उदयपुर शहर केा अलविदा कहा।

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, विकास आयुक्त हथकरघा, नेशनल वूल बार्ड, नेशनल जूट डेवलपमेन्ट बोर्ड, ट्राइफेड तथा देश के अन्य क्षेत्रीय सांस्कृति केन्द्रों के सहयोग से आयोजित उत्सव में 800 शिल्पकारों व 700 लोक कलाकारों ने भाग लिया।

शिल्पग्राम उत्सव: आखिरी दिन उमड़ा शहर

आखिरी दिन हाट बाजार की रंगत मेला प्रारम्भ होते शुरू हो गई तथा दापहर में समूचे हाट बाजार का आलम ये था कि परिसर में चहुँ ओर लोग ही लोग नजर आये। हाट बाजार में शायद ही कोई शिल्प क्षेत्र ऐसा रहा हो जहां लोगों ने खरीददारी ना की हो। कोई शिल्प उत्पाद हाथ में या थैले में जा रहा था तो भारी सामान को गंतव्य स्थान तक पहुंचाने में स्वयं शिल्पकार लोगों की मदद करते नजर आये।

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हाट बाजार में लोगों की मस्ती का आलम ये था कि कोई सेल्फी ले रहा, कोई भुट्टे चगल रहा तो कोई मक्की की पापड़ी खा रहा था। छोटे बच्चे अपने अभिभावकों की गोद में पुपाड़ी या तीर कमान लिये दिखे। अंतिम दिन शिल्पग्राम के दोनों द्वारों दर्पण द्वार व मुख्य प्रवेश द्वार पर लोगों की खासी भीड़ रही।

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