शिल्पी और मनीषा ने प्राप्त की पीएचडी

मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से मनीषा सांचीहर को ‘राजसमंद स्थित नौ चौकी के शिल्पगत कला सौष्ठव का विश्लेषणात्मक अध्ययन’ पर एंव शिल्पी कोठारी को उनके शोध ‘ग्रंथ विभेद विश्लेषण के माध्यम से भारतीय वाणिज्यक बैंको का लाभदायकता विश्लेषण’ पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है।

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शिल्पी और मनीषा ने प्राप्त की पीएचडी

शिल्पी कोठारी एंव मनीषा सांचीहर

मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से मनीषा सांचीहर को ‘राजसमंद स्थित नौ चौकी के शिल्पगत कला सौष्ठव का विश्लेषणात्मक अध्ययन’ पर एंव शिल्पी कोठारी को उनके शोध ‘ग्रंथ विभेद विश्लेषण के माध्यम से भारतीय वाणिज्यक बैंको का लाभदायकता विश्लेषण’ पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है।

मनीषा ने अपना अध्ययन मीरां गर्ल्स कॉलेज में चित्रकला की व्याख्याता डॉ. कहानी भानावत के निर्देशन में किया है; वहीँ शिल्पी ने अपना शोध कार्य यूसीसीएमएस (कामर्स कॉलेज) के डॉ. शूरवीर सिंह भाणावत के निर्देशन में पूरा किया।

मनीषा ने अध्ययन में बताया कि मेवाड़ महाराणा राजसिंह द्वारा गोमती के पानी को रोकने के लिए राजसमंद में जिस बांध का निर्माण कराया उसे नौ चौकी नाम से जाना गया। बांध की पाल पट स्थित मंडपों के वितान पर विभिन्न देवी-देवताओं – विष्णु, शिव, ब्रह्मा एवं इन्द्र की युग्म मूर्तियों के अतिरिक्त अष्ट दिक्पाल, सूर्य आदि का शिल्पांकन देखते ही बनता है।

नाथद्वारा में श्रीनाथजी के पदार्पण के पश्चात इसका निर्माण हुआ जिससे यह स्पष्ट है कि महाराणा ने श्रीनाथजी की भक्ति-अनुरक्ति से वशीभूत हो जिन मूर्तियों का अंकन कराया वे भगवान कृष्ण एवं उनके लीला स्वरूपों का अद्वितीय दृश्यांकन है।

शिल्पी कोठारी के अनुसार उनके शोध से अंशधारियों एवं निवेशकों को बैंको की लाभदायकता का मूल्याकंन करने में सहायता मिलेगी; साथ ही यह निवेशकों को भविष्य के लिए निवेश संबंधी मार्गदर्शन देगा।

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