श्रीमद्धभागवत कथा महोत्सव से नववर्ष का मंगलमय आगाज

भागवत का मूल उद्देश्य है भक्ति की प्राप्ति: संत श्री कृष्णानंद जी महाराज
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Sant Krishnanand ji

उदयपुर 1 जनवरी 2026। नववर्ष के प्रारंभ के साथ आजाद विहार, तीतरडी स्थित श्री वृंदावन धाम आश्रम- राधे कृष्णा मंदिर में बड़ी धूमधाम से श्रीमद्धभागवत कथा महोत्सव का आगाज हुआ। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय भागवत प्रचार मिशन द्वारा पिछले 20 वर्षों से श्री वृंदावन धाम के पवित्र प्रागंण में नववर्ष के प्रथम सप्ताह में आयोजित हो रहा है। कथा का वाचन आश्रम पीठाधीश्वर भूपाल मौली मंडित पाद पीठस्थ सुप्रसिद्ध भागवताचार्य संत श्री कृष्णानंद जी महाराज अपनी ओजस्वी अलंकृत शैली में कर रहे हैं। 

प्रात: 11 बजे पूरे विधिविधान से महाराज जी के सानिध्य में आश्रम स्थित राधे- कृष्णा मंदिर में वृंदावन से आए हुए 11 पंडितों द्वारा भागवत जी का पौथी पूजन करवाया गया। तत्पश्चात बैंडबाजो सहित सम्पूर्ण शहर से पधारे अनुयायियों की उपस्थिति में व्यासपीठ पर भागवत जी को स्थापित किया गया व रूद्र कलश की स्थापना के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। मुख्य यजमान ने सपरिवार गुरु देव को माला व पाग पहनाकर कर आशीर्वाद ग्रहण किया। 

कथा के प्रथम दिन की सभा में व्यासपीठ से महाराज जी ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने भक्तों से कहा कि भागवत का मूल उद्देश्य भक्ति की प्राप्ति करना है। क्योंकि भगवान् तो प्रत्येक जीव को जन्म पूर्व गर्भ से ही प्राप्त है परन्तु भक्ति हर किसी को नहीं मिलती हैं। किसी-‌किसी विरले को ही मात्र हरि व गुरु की कृपा से इसकी प्राप्ति होती है। भागवत संसार में डूबे जीव को भक्ति प्राप्त कर प्रभु का स्मरण करवाती हैं। उसे अपनी मूल चेतना में स्थित करती हैं। सभा अंत में सभी भक्तों द्वारा महाआरती की गई। 

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