सरसों की इन किस्मों की करें अपने खेतों में बिजाई, पैदावार होगी दोगुनी, जाने सिंचाई से कटाई का पूरा प्रोसेस ?
Udaipur Times, New Delhi, Sarso Bijayi : रबी फसलों की बुवाई की तैयारी शुरू हो गई है। सरसों की अगेती बिजाई के लिए अब सबसे उपयुक्त समय है। सही समय पर बिजाई करने से पौधे में बीमारियां और कीट लगने की संभावना बेहद कम हो जाती है। जिससे पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले सरसों की बिजाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर लेने की जरूरत है।
पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले कृषि यंत्र से और बाद में 2-3 जुताई कल्टीवेटर से करके मिट्टी को भुरभुरा करने की आवश्यकता है। इसमें खेत में पाटा लगाकर जमीन को समतल करने से खेत में नमी बनी रहेगी। सरसों के बेहतर अंकुरण के लिए खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है। यदि खेत सूखा है तो बिजाई से पहले हल्का पलेवा जरूर करना चाहिए।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगत ने बताया कि सामान्य तौर पर प्रति एकड़ 35-40 किग्रा यूरिया, 50-60 किग्रा एसएसपी और 12-15 किग्रा पोटाश बिजाई के समय दें। तिलहनी फसल होने के कारण प्रति एकड़ 8-10 किग्रा सल्फर का इस्तेमाल दाने में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए बेहद फायदेमंद है। 2-3 ग्राम ट्राइकोर्मा या बाविस्टिन प्रति किग्रा. बीज की दर से मिलाकर बिजाई करें। इससे उकठा और तना गलन जैसी बीमारियों का खतरा समाप्त हो जाता है।
इन किस्मों से 8 से 11 क्विंटल पैदावार
किस्म पकाने के दिन औसत पैदावार
आरएच 30 130 से 135 8 से 10
पूसा 28 105 से 110 7 से 9
पूसा 30 130 से 135 8 से 10
गिरिराज 31 125 से 130 9 से 11
बिजाई 2-3 सेमी से अधिक गहरी न करें
एक एकड़ के लिए 1.5 से 2 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेमी. और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखें। बीज को 2 से 3 सेमी. से अधिक गहरा न बोएं।
अगेती बिजाई के समय यदि तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो तो बिजाई 2-4 दिन टाल दें, वरना अंकुरण पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।