ऐसे शुरू करें पोल्ट्री फार्म का बिजनेस, जाने इसके लिए कितने जमीन की पड़ेगी जरूरत ? जाने पूरा हिसाब
Udaipur Times, Poultry Farm Business : भारत में अंडे और चिकन की मांग लगातार बनी रहती है। यही वजह है कि गांवों से लेकर छोटे शहरों तक बड़ी संख्या में लोग पोल्ट्री फार्मिंग को कमाई के एक विकल्प के तौर पर देखते हैं। इस बिजनेस की खास बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए शुरुआत में बहुत बड़े स्तर पर निवेश करना जरूरी नहीं है।
अगर आपके पास अपनी जमीन है तो आप अपनी क्षमता और बजट के हिसाब से कम संख्या में मुर्गियों के साथ फार्म शुरू कर सकते हैं और अनुभव बढ़ने के साथ धीरे-धीरे इसका विस्तार कर सकते हैं। हालांकि, पोल्ट्री फार्म शुरू करना सिर्फ मुर्गियां खरीदकर उन्हें शेड में रखने तक सीमित नहीं है। इसके लिए जमीन का सही चुनाव, शेड की व्यवस्था, चारा, पानी, सफाई, टीकाकरण, बीमारी से बचाव और बिक्री के लिए बाजार तैयार करना बेहद जरूरी है।
पोल्ट्री फार्म के लिए कितनी चाहिए जमीन?
पोल्ट्री फार्म के लिए जमीन की कोई एक तय सीमा नहीं है। जमीन की जरूरत मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी मुर्गियां पालना चाहते हैं, फार्म का मॉडल क्या होगा और मुर्गियों को किस तरह रखा जाएगा। छोटे स्तर पर 500 या 1000 मुर्गियों से फार्म शुरू करने वाला व्यक्ति बड़े कमर्शियल फार्म की तुलना में काफी कम जमीन में काम शुरू कर सकता है। लेकिन सिर्फ मुर्गियों के शेड जितनी जगह देखकर जमीन तय करना सही नहीं होगा।
फार्म के लिए जमीन का प्लान बनाते समय मुर्गियों के शेड के अलावा चारा रखने की जगह, पानी की व्यवस्था, उपकरण, दवाइयां, अंडे या तैयार चिकन रखने की जगह, कर्मचारियों के आने-जाने और वाहन की आवाजाही के लिए भी जगह रखनी होगी। भविष्य में अगर फार्म का विस्तार करना हो तो अतिरिक्त जगह का प्रावधान पहले से रखना भी फायदेमंद हो सकता है। इसलिए जमीन खरीदने या शेड बनाने से पहले मुर्गियों की प्रस्तावित संख्या के आधार पर पूरा लेआउट तैयार करना बेहतर रहेगा।
500 से 1000 मुर्गियों से कर सकते हैं शुरुआत
अगर कोई व्यक्ति पहली बार पोल्ट्री बिजनेस शुरू कर रहा है तो सीधे हजारों मुर्गियों वाला बड़ा फार्म शुरू करने के बजाय छोटे स्तर से शुरुआत करना अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है। उदाहरण के लिए 500 से 1000 मुर्गियों के साथ शुरुआत करके फार्म के रोजमर्रा के काम, चारे की खपत, बीमारी से बचाव, श्रम की जरूरत और स्थानीय बाजार की मांग को समझा जा सकता है।
शुरुआत में कम संख्या होने से नए कारोबारी को यह समझने का मौका मिलता है कि एक निश्चित संख्या में मुर्गियों को पालने में कितना खर्च आता है और बिक्री से कितनी आय हो सकती है। जब फार्म का संचालन समझ में आने लगे और बाजार में बिक्री का नेटवर्क तैयार हो जाए, तब मुर्गियों की संख्या बढ़ाकर कारोबार का विस्तार किया जा सकता है।
सबसे जरूरी है सही शेड बनाना
पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के लिए शेड सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में से एक है। शेड ऐसा होना चाहिए जहां पर्याप्त हवा और रोशनी पहुंच सके और मुर्गियों को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाया जा सके। गर्मी के मौसम में अत्यधिक तापमान मुर्गियों के स्वास्थ्य और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है, जबकि ठंड और बारिश से बचाव की भी उचित व्यवस्था जरूरी होती है।
शेड का आकार मुर्गियों की संख्या के हिसाब से तय किया जाना चाहिए। अगर एक छोटी जगह में जरूरत से ज्यादा मुर्गियां रख दी जाएं तो भीड़ बढ़ सकती है, जिससे मुर्गियों में तनाव, बीमारी और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए फार्म शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि कितनी मुर्गियों के लिए कितना शेड और कितनी खुली जगह उपलब्ध होगी।
शेड में सफाई करना आसान हो, पानी की निकासी की उचित व्यवस्था हो और चारा-पानी उपलब्ध कराने में कर्मचारियों को परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखना चाहिए। फार्म के आसपास गंदा पानी या कचरा जमा नहीं होने देना चाहिए।
लेयर फार्म खोलना है या ब्रॉयलर फार्म?
पोल्ट्री बिजनेस शुरू करने से पहले सबसे बड़ा फैसला यह करना होता है कि आप लेयर फार्म चलाना चाहते हैं या ब्रॉयलर फार्म। दोनों का उद्देश्य और संचालन अलग होता है।
लेयर मुर्गियों को मुख्य रूप से अंडे के उत्पादन के लिए पाला जाता है। इस मॉडल में मुर्गियों की देखभाल, पोषण और उत्पादन व्यवस्था पर लगातार ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि कमाई का मुख्य स्रोत अंडों की बिक्री होती है।
वहीं ब्रॉयलर मुर्गियों को मुख्य रूप से मांस के लिए पाला जाता है। इसमें मुर्गियों को निर्धारित अवधि तक तेजी से वजन बढ़ाने के लिए पोषण दिया जाता है और तैयार होने के बाद बाजार में बेच दिया जाता है। दोनों मॉडल में चारे, देखभाल, बीमारी से बचाव और बिक्री की रणनीति अलग-अलग हो सकती है।
इसलिए बिजनेस शुरू करने से पहले अपने इलाके की मांग, उपलब्ध बाजार और अपने बजट को देखते हुए तय करें कि अंडे का कारोबार करना है या चिकन का।
मुर्गियों के चारे पर होगा बड़ा खर्च
पोल्ट्री फार्म में नियमित खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चारे पर आता है। मुर्गियों की नस्ल, उम्र और फार्म के प्रकार के अनुसार उनके पोषण की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए मुर्गियों को उनकी जरूरत के अनुसार संतुलित आहार देना जरूरी है। चारा खरीदने से पहले स्थानीय बाजार में इसकी कीमत और उपलब्धता की जानकारी लेना चाहिए। फार्म शुरू करते समय सिर्फ मुर्गियां और शेड का खर्च जोड़ना पर्याप्त नहीं है।
कारोबारी को यह भी देखना होगा कि हर दिन चारे पर कितना खर्च आएगा और फार्म के आकार के साथ यह खर्च किस तरह बढ़ेगा। अगर चारे की गुणवत्ता या मात्रा में लापरवाही की जाती है तो मुर्गियों के स्वास्थ्य और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसलिए चारे के खर्च को बिजनेस प्लान में पहले से शामिल करना बेहद जरूरी है।
साफ पानी की व्यवस्था भी जरूरी
मुर्गियों के लिए पर्याप्त और साफ पानी की लगातार उपलब्धता जरूरी है। फार्म में पानी का इस्तेमाल सिर्फ मुर्गियों को पिलाने के लिए नहीं होता, बल्कि शेड और आसपास की सफाई में भी इसकी जरूरत पड़ती है। इसलिए पोल्ट्री फार्म ऐसी जगह पर शुरू करना बेहतर होता है जहां पानी की व्यवस्था आसानी से हो सके।
फार्म परिसर में पानी जमा नहीं होना चाहिए। गीली और गंदी जगह से संक्रमण और बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इसके लिए जमीन का ड्रेनेज और पानी की निकासी पहले से प्लान करना जरूरी है। पानी की टंकी, पाइपलाइन और मुर्गियों के लिए पीने की व्यवस्था इस तरह की जानी चाहिए कि साफ पानी लगातार उपलब्ध रहे।
बीमारी से बचाव के लिए सफाई पर दें खास ध्यान
पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों की बीमारी पूरे कारोबार को प्रभावित कर सकती है। इसलिए शेड की साफ-सफाई और जैव-सुरक्षा यानी बायो-सिक्योरिटी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। फार्म में अनावश्यक लोगों और बाहरी जानवरों की आवाजाही को नियंत्रित करना, गंदगी को समय पर हटाना और उपकरणों की नियमित सफाई करना जरूरी है।
मुर्गियों की तबीयत खराब होने पर खुद से दवा देने के बजाय जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है। फार्म में मुर्गियों के लिए जरूरी टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था भी स्थानीय पशु चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार रखनी चाहिए।
किसी बीमारी के फैलने की स्थिति में बड़ी संख्या में मुर्गियां प्रभावित हो सकती हैं और कारोबारी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए बीमारी होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय शुरुआत से ही रोकथाम पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
जमीन खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पोल्ट्री फार्म के लिए जमीन चुनते समय सिर्फ कीमत या क्षेत्रफल को नहीं देखना चाहिए। जमीन ऐसी जगह हो जहां पानी की उपलब्धता, सड़क से संपर्क, बिजली और परिवहन की सुविधा हो। फार्म से चारा लाने और तैयार अंडे या चिकन को बाजार तक पहुंचाने के लिए सड़क संपर्क बेहद महत्वपूर्ण है।
ऐसी जगह चुनना भी बेहतर है जहां जलभराव की समस्या न हो। आसपास अत्यधिक गंदगी या प्रदूषण हो तो फार्म के संचालन में परेशानी आ सकती है। जमीन पर शेड बनाने से पहले स्थानीय नियमों, भूमि उपयोग और संबंधित प्रशासनिक आवश्यकताओं की जानकारी लेना भी जरूरी है।
बाजार की मांग देखकर ही शुरू करें बिजनेस
पोल्ट्री फार्म शुरू करने से पहले यह पता करना जरूरी है कि आपके इलाके में अंडे या चिकन की कितनी मांग है। अगर उत्पादन तो हो जाए लेकिन बिक्री के लिए खरीदार न मिले तो कारोबार में परेशानी आ सकती है। इसलिए फार्म शुरू करने से पहले ही स्थानीय बाजार को समझना चाहिए।
आप अपने आसपास के किराना दुकानदारों, अंडा विक्रेताओं, होटल, रेस्टोरेंट, मीट दुकानों, थोक खरीदारों और अन्य स्थानीय कारोबारियों से संपर्क कर सकते हैं। उनसे यह समझने की कोशिश करें कि उन्हें कितनी मात्रा में अंडे या चिकन की जरूरत होती है और किस कीमत पर खरीदारी करते हैं। बिक्री का नेटवर्क पहले से तैयार होने पर मुर्गियों या अंडों के तैयार होने के बाद बाजार खोजने में कम परेशानी होगी। शुरुआत में स्थानीय बाजार पर ध्यान देना और बाद में ग्राहक बढ़ाना छोटे कारोबारियों के लिए व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
बजट बनाते समय इन खर्चों को जरूर जोड़ें
पोल्ट्री फार्म शुरू करने से पहले पूरा बजट तैयार करना जरूरी है। इसमें सिर्फ मुर्गियां खरीदने की कीमत शामिल नहीं होनी चाहिए। जमीन, शेड, बिजली, पानी, चारा, चूजे या मुर्गियां, उपकरण, दवाइयां, टीकाकरण, सफाई, मजदूरी और परिवहन जैसे खर्चों को भी शामिल करना होगा।
इसके अलावा कुछ राशि आकस्मिक खर्च के लिए रखना बेहतर है। अगर बीमारी फैलती है, चारे की कीमत बढ़ती है या बिक्री में कुछ समय के लिए गिरावट आती है तो फार्म को चलाने के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए पूरा पैसा शुरुआत में ही निर्माण और मुर्गियां खरीदने में लगा देना उचित नहीं होगा।
सरकारी योजना और लोन की जानकारी भी लें
पोल्ट्री फार्म शुरू करने से पहले अपने जिले के पशुपालन विभाग, कृषि विभाग या संबंधित सरकारी कार्यालय से उपलब्ध योजनाओं और वित्तीय सहायता की जानकारी ली जा सकती है। अलग-अलग राज्यों और योजनाओं में पात्रता, सब्सिडी, लोन और अन्य सहायता की शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी एजेंट या सोशल मीडिया पर मौजूद अपुष्ट जानकारी के आधार पर निवेश करने के बजाय संबंधित सरकारी विभाग से मौजूदा नियमों और पात्रता की पुष्टि करना बेहतर है। अगर बैंक से लोन लेना है तो बिजनेस प्लान, अनुमानित खर्च, आय और फार्म की क्षमता का स्पष्ट विवरण तैयार रखना मददगार हो सकता है।
धीरे-धीरे बढ़ाएं फार्म का आकार
नए व्यक्ति के लिए पोल्ट्री फार्म में सबसे जरूरी चीज सिर्फ निवेश नहीं बल्कि अनुभव भी है। इसलिए शुरुआत में अपनी क्षमता के अनुसार सीमित संख्या में मुर्गियां रखना और कारोबार को समझना बेहतर हो सकता है। इससे चारे की खपत, मुर्गियों की देखभाल, बीमारी से बचाव और बाजार में बिक्री की वास्तविक स्थिति का अनुभव मिलेगा।
जब फार्म से जुड़े खर्च और बिक्री का सही अंदाजा हो जाए, तब मुर्गियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इस तरह धीरे-धीरे शेड का विस्तार, बेहतर उपकरण और बड़ा बिक्री नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।
पोल्ट्री फार्म शुरू करने से पहले ये 7 चीजें जरूर तय करें
कितनी मुर्गियों से शुरुआत करनी है।
लेयर फार्म खोलना है या ब्रॉयलर फार्म।
शेड और भविष्य के विस्तार के लिए कितनी जमीन चाहिए।
चारा और पानी की नियमित व्यवस्था कहां से होगी।
सफाई, बीमारी से बचाव और पशु चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था कैसे होगी।
मुर्गियों या अंडों को बेचने के लिए बाजार और खरीदार कौन होंगे। शेड, मुर्गियों, चारे और अन्य खर्चों के लिए कुल बजट कितना है।
कुल मिलाकर, पोल्ट्री फार्मिंग छोटे स्तर से शुरू करके धीरे-धीरे बड़ा किया जा सकने वाला कारोबार है, लेकिन इसमें मुनाफा सिर्फ मुर्गियों की संख्या बढ़ाने से तय नहीं होता। सही जमीन, पर्याप्त शेड, साफ पानी, गुणवत्तापूर्ण चारा, नियमित देखभाल, बीमारी से बचाव और मजबूत बाजार नेटवर्क इसकी सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर शुरुआत से ही इन सभी पहलुओं का हिसाब लगाकर फार्म शुरू किया जाए तो नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है और कारोबार को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।