हरियाणा में यहां बनेंगे अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग डिपो, 1000 EV वाहनों को मिली हरी झंडी
Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : विश्व पर्यावरण दिवस-2026 हरियाणा के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण साबित हुआ। एक ओर जहां पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़कर हरियाणा को हरित और पर्यावरण-अनुकूल राज्य बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम से 1000 ‘मेड इन इंडिया’ इलेक्ट्रिक वाहनों के बेड़े को हरी झंडी दिखाकर एनसीआर क्षेत्र में हरित परिवहन क्रांति का शुभारंभ किया। इस पहल को स्वच्छ ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण और टिकाऊ विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर राव नरबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दूरदर्शी एवं प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने ग्रीन एमएस इंडिया तथा विंग गुरु ज्वाइंट स्टॉक कंपनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की ऐसी भागीदारी वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भावी पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण और गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना भी है। पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति एक-दूसरे के पूरक हैं तथा हरित प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी हैं।
राव नरबीर सिंह ने बताया कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही है। रेवाड़ी और पंचकूला में हरियाणा परिवहन के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग डिपो स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन विकसित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1972 में पर्यावरण संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 1973 में ‘ओनली वन अर्थ’ थीम के साथ इसका पहला आयोजन हुआ था। इसके बाद जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण, वनों की कटाई, खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन जैसे विषयों को केंद्र में रखकर यह दिवस मनाया जाता रहा है। इस वर्ष की थीम ‘प्रकृति से प्रेरित—जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए’ निर्धारित की गई है, जो प्रकृति आधारित समाधानों के माध्यम से जलवायु चुनौतियों का सामना करने का संदेश देती है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन को साकार करने में हरियाणा अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘विकसित हरियाणा विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार किया है, जिसके तहत प्रत्येक विभाग के लिए वर्ष 2030-31 तक का स्पष्ट रोडमैप और चरणबद्ध कार्ययोजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं विभिन्न विभागों के साथ नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से इस विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित 100 करोड़ रुपये का ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड हरियाणा में शून्य-उत्सर्जन वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, शहरी हरितीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि तथा प्रकृति-आधारित समाधानों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से वायु एवं जल प्रदूषण की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार आधारित निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।
विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशभर में हुए कार्यक्रमों और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के प्रति दिखाई गई व्यापक जनभागीदारी ने स्पष्ट संकेत दिया कि हरियाणा अब केवल विकास की नहीं, बल्कि हरित और सतत विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
