हरियाणा में जमीन लेन-देन पर सख्ती ! सरकार ने बदल दिए नियम, ऐसे होगी रजिस्ट्री
Udaipur Times, Government Approval will be required for land exchange in Haryana : हरियाणा सरकार ने शहरी क्षेत्रों के आसपास होने वाले भूमि लेन-देन को लेकर नियमों को और सख्त करने की तैयारी कर ली है। सरकार का उद्देश्य जमीन के नाम पर होने वाली कथित धोखाधड़ी और अवैध कॉलोनियों के विस्तार पर रोक लगाना है।
भूमि एक्सचेंज पर अब अनिवार्य होगी अनुमति
नए प्रावधानों के तहत अब शहरी निकायों और नगर परिषद क्षेत्रों में आने वाली अधिसूचित भूमि के एक्सचेंज (भूमि अदला-बदली) के लिए संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यदि भूमि का क्षेत्रफल एक एकड़ से कम है, तो इसके लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक या अधिकृत अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।
अवैध कॉलोनियों पर रोक का लक्ष्य
सरकार का मानना है कि कई मामलों में कम मूल्य की जमीन देकर अधिक मूल्य की जमीन हासिल की जा रही थी, जिससे नियमों का उल्लंघन हो रहा था। भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा दिया जा रहा था। इसी कारण अब नियमों में संशोधन किया गया है।
हरियाणा अर्बन एरिया डेवलपमेंट एक्ट में संशोधन
Haryana Urban Area Development and Regulation Act, 1975 की धारा 7-A में बदलाव किया गया है। इस संशोधन के तहत भूमि एक्सचेंज को भी अब रेगुलेटरी दायरे में शामिल कर लिया गया है।
हालांकि यह बिल विधानसभा के बजट सत्र में पास हो चुका है, लेकिन अभी इसे राज्यपाल की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए नोटिफिकेशन जारी नहीं हो पाया है।
पहले से लागू नियम क्या कहते हैं?
पहले से ही नियमों के अनुसार अधिसूचित शहरी क्षेत्रों में एक एकड़ से कम खाली जमीन की बिक्री, लीज या ट्रांसफर के लिए NOC (No Objection Certificate) लेना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य शहरी विकास को नियंत्रित रखना और जमीन के उपयोग को नियमानुसार सुनिश्चित करना है।
जमीन एक्सचेंज में गड़बड़ियों का खुलासा
जांच के दौरान सामने आया कि कई लोग भूमि एक्सचेंज के नाम पर असल में जमीन की खरीद-फरोख्त कर रहे थे। छोटे प्लॉट देकर बड़े और महंगे प्लॉट हासिल किए जा रहे थे, जिससे नियमों से बचने की कोशिश की जा रही थी।
सरकार का उद्देश्य: पारदर्शिता और नियंत्रण
सरकार का कहना है कि इस संशोधन से जमीन लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध कॉलोनियों के विकास पर रोक लगेगी। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों के आसपास अनियंत्रित विकास को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
