पहले ही प्रयास में BPSC में हासिल की सफलता, कम उम्र के कारण नहीं बन सकीं SDM, असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर का पद हुआ प्राप्त

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पहले ही प्रयास में BPSC में हासिल की सफलता, कम उम्र के कारण नहीं बन सकीं SDM, असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर का पद हुआ प्राप्त 

Udaipur Times, Muskan Kumari BPSC Success Story: बिहार के बेगूसराय के बखरी की रहने वाली मुस्कान कुमारी ने सिर्फ़ 21 साल की उम्र में 70वीं BPSC परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल करके एक मिसाल कायम की है। शादीशुदा होने के बावजूद, उन्होंने अपने परिवार के पूरे सहयोग से अपनी पढ़ाई जारी रखी।

पहले ही प्रयास में BPSC में हासिल की सफलता

उम्र की सीमा की वजह से नहीं बन सकीं SDM 

हालांकि, उम्र की सीमा की वजह से वह SDM नहीं बन सकीं। BPSC के नियमों के अनुसार SDM पद के लिए कम से कम 22 साल की उम्र ज़रूरी है, इसलिए उनका चयन किसी दूसरे पद के लिए हुआ। 

पहले ही प्रयास में BPSC में हासिल की सफलता

असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर के पद के लिए चुना गया

मुस्कान बखरी के मशहूर स्वर्ण व्यवसायी कन्हैयालाल साह की बहू और किशन साह की पत्नी हैं। उन्हें असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर के पद के लिए चुना गया है। उनकी कामयाबी से उनके पूरे परिवार और स्थानीय समुदाय में खुशी का माहौल है। मुस्कान अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और ससुराल वालों को देती हैं।

अपनी काबिलियत साबित कर दिखाई

मुस्कान बखरी का कहना है कि बहुत कम परिवार ही अपनी बहुओं को घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने सपने पूरे करने की इजाजत देते हैं। उन्हें यह मौका मिला और उन्होंने अपनी काबिलियत साबित कर दिखाई। 

पहले ही प्रयास में BPSC में हासिल की सफलता

दोनों परिवारों के लिए खास पल

बिहार सरकार के मंत्री संजय पासवान ने मुस्कान को उनकी कामयाबी के लिए सम्मानित किया। सभी ने उनकी कड़ी मेहनत और लगन की तारीफ़ की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  यह मुस्कान और उनके परिवार, दोनों के लिए वाकई एक खास पल था। एक सम्मान समारोह में, तैलिक वैश्य संघ ने उन्हें 'भामाशाह रत्न सम्मान' से सम्मानित किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष त्रिपुरारी साह ने की, जबकि पूर्व महासचिव नीरज नवीन ने कार्यक्रम का संचालन किया।

पहले ही प्रयास में BPSC में हासिल की सफलता

मुस्कान ने बताया कि वह SDM का पद इसलिए हासिल नहीं कर सकीं क्योंकि वह BPSC नियमों के तहत ज़रूरी 22 साल की न्यूनतम उम्र की शर्त पूरी नहीं करती थीं, जिसके चलते उन्हें किसी दूसरे पद के लिए चुना गया।

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