भारत का एक ऐसा रहस्यमयी गांव ! जहां किसी चीज को छूने पर लगता है भारी जुर्माना, जाने वजह ?

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भारत का एक ऐसा रहस्यमयी गांव ! जहां किसी चीज को छूने पर लगता है भारी जुर्माना, जाने वजह ?

Udaipur Times, Malana Village : हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी में करीब 2,652 मीटर की ऊंचाई पर बसा मालाणा गांव (Malana Village) अपनी अनोखी परंपराओं और सदियों पुरानी संस्कृति के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस गांव की सबसे खास बात यह है कि यहां आने वाले बाहरी लोगों को गांव के घरों, मंदिरों, दीवारों, स्थानीय लोगों या उनकी किसी भी वस्तु को छूने की अनुमति नहीं होती। नियम तोड़ने पर 3,500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

बाहरी लोगों के स्पर्श से गांव की पवित्रता भंग होती है (No Touch Rule) 

मालाणा के लोग अपने आराध्य देव जमलू देवता (जमदग्नि ऋषि) को गांव का सर्वोच्च शासक मानते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि बाहरी लोगों के स्पर्श से गांव की पवित्रता भंग होती है। इसलिए यहां सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि पर्यटक किसी भी चीज को हाथ न लगाएं।

गांव चलता है अपनी अलग व्यवस्था से

मालाणा को भारत के सबसे प्राचीन स्वशासित गांवों में गिना जाता है। यहां गांव की अपनी पारंपरिक परिषद है, जो सभी विवादों का निपटारा करती है। ग्रामीण कनाशी (Kanashi) नाम की एक अलग भाषा बोलते हैं, जिसे बाहरी लोग न तो सीख सकते हैं और न ही इस्तेमाल कर सकते हैं। 

गांव में अपनी संसद भी है, जिसमें दो सदन हैं- एक बड़ा और एक छोटा। बड़े सदन में कुल 11 सदस्य होते हैं। इनमें से 8 सदस्यों का चुनाव गांव के लोग करते हैं, जबकि 3 सदस्य स्थायी होते हैं, जिनमें कारदार, गुर और पुजारी शामिल हैं। छोटे सदन में गांव के प्रत्येक परिवार का सबसे बुजुर्ग सदस्य शामिल होता है। अगर बड़े सदन के किसी सदस्य का निधन हो जाए, तो पूरे सदन का दोबारा गठन किया जाता है। गांव में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने अधिकारी और स्थानीय व्यवस्था भी मौजूद है। 

इस गांव में किसी भी विवाद या महत्वपूर्ण मामले पर पहले संसद में चर्चा होती है। अगर संसद किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाती, तो अंतिम फैसला जमलू देवता के नाम पर लिया जाता है। गांव के लोग जमलू ऋषि को अपना आराध्य देव मानते हैं और उनका निर्णय सभी के लिए अंतिम माना जाता है। 

मंदिर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित

गांव के बीच स्थित जमलू देवता मंदिर में बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। मंदिर की दीवार, लकड़ी की नक्काशी या परिसर के किसी भी हिस्से को छूना नियमों के खिलाफ माना जाता है। ऐसा करने पर शुद्धिकरण के लिए जुर्माना देना पड़ सकता है।

रात में रुकने की भी नहीं है अनुमति

साल 2017 से गांव की परिषद ने मुख्य गांव के भीतर पर्यटकों के ठहरने पर रोक लगा दी है। अब पर्यटक केवल दिन में गांव घूम सकते हैं। रात में ठहरने के लिए उन्हें कसोल, जरी या गांव की सीमा के बाहर बने अधिकृत कैंप और गेस्ट हाउस का सहारा लेना पड़ता है।

यहां अकबर की भी होती है पूजा

मलाणा गांव की एक और अनोखी परंपरा लोगों को हैरान कर देती है। यहां हर साल फागली उत्सव के दौरान मुगल बादशाह अकबर का सम्मान और पूजा की जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक बार अकबर ने जमलू ऋषि की दिव्य शक्ति की परीक्षा लेने के लिए दिल्ली में बर्फबारी कराने की इच्छा जताई थी। 

कहा जाता है कि जमलू ऋषि ने अपनी शक्ति से यह चमत्कार कर दिखाया। तभी से गांव के लोग अकबर के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं और फागली उत्सव में उनकी पूजा की परंपरा निभाते आ रहे हैं।

सिकंदर के सैनिकों से जुड़ी है गांव की कहानी

मलाणा गांव को लेकर एक और दिलचस्प मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि 326 ईसा पूर्व भारत अभियान के दौरान सिकंदर महान की सेना के कुछ सैनिक यहीं आकर बस गए थे। इसी वजह से गांव के कुछ लोग खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि करने वाले ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। 

फिर भी गांव की कनाशी भाषा में कुछ ऐसे शब्द बताए जाते हैं, जिनकी समानता ग्रीक भाषा से जोड़ी जाती है। स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि सिकंदर के समय की एक तलवार आज भी गांव के मंदिर में सुरक्षित रखी गई है। इसी कारण मलाणा को कई लोग "सिकंदर के सैनिकों का गांव" भी कहते हैं।

4 किलोमीटर की ट्रैकिंग के बाद पहुंचते हैं पर्यटक

मालाणा तक पहुंचने के लिए जरी के पास सड़क समाप्त होने के बाद करीब 4 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है। रास्ते में पहले नदी तक उतरना और फिर पत्थरों की सीढ़ियों से खड़ी चढ़ाई करनी होती है। यह ट्रैक लगभग 1.5 घंटे में पूरा होता है।

पर्यटकों के लिए जरूरी नियम

गांव में किसी व्यक्ति, घर, दीवार, मंदिर या सामान को हाथ न लगाएं।

केवल निर्धारित रास्तों पर ही चलें।

स्थानीय रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करें।

विदेशी पर्यटकों को ट्रेक मार्ग पर बने पुलिस चेक पोस्ट पर पासपोर्ट और वीजा के साथ पंजीकरण कराना होता है।

क्यों है खास?

प्राकृतिक सुंदरता, अनोखी संस्कृति, प्राचीन लोकतांत्रिक व्यवस्था और सैकड़ों साल पुरानी परंपराओं के कारण मालाणा आज भी भारत के सबसे रहस्यमयी गांवों में गिना जाता है। यहां आने वाले पर्यटकों को गांव के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, तभी वे इस अनोखे अनुभव का आनंद ले सकते हैं।

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