हरियाणा में गर्मी और लू से बचाव के लिए पशुओं की रखे देखभाल, DC का पशुपालकों से आह्वान

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Udaipur Times, Haryana News, झज्जर : डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि भीषण गर्मी के मौसम में पशुओं को लू (हीट स्ट्रेस) से बचाना अत्यंत आवश्यक है। अधिक तापमान के कारण पशुओं में दूध उत्पादन पर भी असर पड़ता है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे समय रहते जरूरी सावधानियां अपनाकर पशुओं को सुरक्षित रखें।

छाया और ठंडे वातावरण की पशुओं के लिए करें व्यवस्था

डीसी वर्षा खांगवाल ने बताया कि पशुपालक अपने पशुओं को हमेशा छायादार स्थान पर रखें। इसके लिए पेड़ों की छाया, शेड या टीन की छत का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि शेड की छत पर फूस, घास या सफेद पेंट का प्रयोग करने से गर्मी का प्रभाव कम होता है और पशुओं को राहत मिलती है।

उन्होंने कहा कि गर्मियों में पशु सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक पानी पीते हैं, इसलिए उन्हें 24 घंटे साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाए। पानी की कमी से पशुओं में कमजोरी और हीट स्ट्रेस की समस्या बढ़ सकती है।
डीसी ने कहा कि पशुओं को सुबह और शाम के समय ही चराने या बाहर ले जाने का प्रयास करें। दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक पशुओं को छाया में रखना चाहिए ताकि तेज धूप का असर उन पर न पड़े।

पशुओं पर पानी का छिडक़ाव और पंखों का उपयोग लाभकारी

डीसी ने बताया कि दिन में 2 से 3 बार पशुओं पर पानी का छिडक़ाव या जरूरत अनुरूप नहलाना लाभकारी होता है। इसके अलावा पंखे या फॉगर्स (मिस्ट स्प्रे) का उपयोग करने से भी पशुओं के शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।

पशुओं को संतुलित आहार और मिनरल मिक्सचर दें पशुपालक

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ मनीष डबास  ने बताया कि पशुपालक  पशुओं को हरा चारा, अच्छा सूखा चारा और संतुलित खुराक दें। सड़ा-गला या खराब चारा न खिलाएं। साथ ही मिनरल मिक्सचर और नमक चट्टी उपलब्ध कराने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बना रहता है और पशु स्वस्थ रहता है।

उन्होंने बताया कि यदि पशु तेज सांस लेने लगे, हांफने लगे, अत्यधिक लार टपकाए, शरीर का तापमान बढ़ जाए, सुस्ती महसूस करे या चारा खाना बंद कर दे, तो यह लू लगने के संकेत हो सकते हैं।

गंभीर स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से करें संपर्क

उन्होंने बताया कि लू लगने की स्थिति में पशु को तुरंत छायादार और ठंडी जगह पर ले जाएं, उसके शरीर पर ठंडे पानी का छिडक़ाव करें और साफ पानी पिलाएं। यदि स्थिति गंभीर हो तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

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