मानसून में गाय-भैंस की सेहत का रखें इस तरह से खास ध्यान, बाल्टी भर-भरकर मिलेगा दूध
Ways to care for milch animals during the monsoon: बारिश का मौसम दुधारू पशुओं के लिए कई परेशानियां लेकर आता है। इस मौसम में बढ़ी हुई नमी और उमस का असर सीधे पशुओं की सेहत (Health) और दूध उत्पादन (Milk production) पर पड़ता है। कई बार किसान अच्छी देखभाल के बावजूद देखते हैं कि अचानक दूध की मात्रा कम होने लगी है। पशु विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम बदलने के साथ पशुओं की जरूरतें भी बदल जाती हैं। अगर समय रहते उनके खानपान और देखभाल में बदलाव नहीं किया जाए तो दूध उत्पादन में गिरावट आना स्वाभाविक है।
पुरानी डाइट (Old diet) देना पड़ सकता है भारी
मानसून में पशुओं का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) धीमा हो जाता है, जिससे भोजन पचाने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में गर्मियों वाली डाइट जारी रखने से पोषण का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए इस मौसम में आसानी से पचने वाला और संतुलित आहार देना जरूरी है।
उमस से बढ़ता है तनाव (Tension)
बारिश के मौसम में नमी अधिक होने के बावजूद उमस पशुओं को काफी परेशान करती है। लगातार चिपचिपाहट और गर्मी के कारण पशु तनाव में आ जाते हैं, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है। इसलिए उन्हें साफ, ठंडा और हवादार वातावरण देना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पशुओं को समय-समय पर नहलाना चाहिए। खासकर शाम को दूध निकालने से पहले स्नान कराने से उन्हें काफी राहत मिलती है और दूध उत्पादन बेहतर हो सकता है।
दूध निकालने का समय (Milking time) भी है महत्वपूर्ण
मानसून में दूध निकालने का समय भी अहम भूमिका निभाता है। सुबह का दूध 6 बजे से पहले निकाल लेना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इसके बाद तापमान और उमस बढ़ने लगती है। वहीं, शाम को दूध निकालने से पहले पशु को नहलाने से वह तनावमुक्त रहता है और दूध की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
संतुलित आहार और मिनरल मिक्सचर (Balanced diet and mineral mixture) जरूरी
पशु विशेषज्ञों का कहना है कि दूध बढ़ाने के लिए महंगे उपायों की जरूरत नहीं होती। सबसे जरूरी है संतुलित आहार और मिनरल मिक्सचर का इस्तेमाल। बाजार में आसानी से मिलने वाला मिनरल मिक्सचर पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।
हरा चारा (Green fodder) बढ़ाता है दूध
मानसून में हरे चारे की अहमियत और बढ़ जाती है। बरसीम, नेपियर घास और ज्वार जैसे पौष्टिक चारे पशुओं को जरूरी पोषक तत्व देते हैं। इससे पाचन बेहतर रहता है, शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
कैल्शियम (Calcium) की कमी न होने दें
दुधारू पशुओं में कैल्शियम की कमी से दूध उत्पादन घट सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चूने का पानी यानी लाइम वाटर कैल्शियम की पूर्ति का एक आसान तरीका हो सकता है। इसके लिए 250 ग्राम चूना पानी में डालकर रातभर छोड़ दें और अगले दिन ऊपर का साफ पानी आधा से एक गिलास तक पशु को पिलाया जा सकता है।
पूरे साल रखें खास ध्यान (Care)
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मानसून ही नहीं, बल्कि पूरे साल पशुओं को संतुलित और मौसमी आहार देना चाहिए। पर्याप्त पानी, साफ वातावरण, हरा चारा और समय पर देखभाल से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन लंबे समय तक अच्छा बना रहता है। इससे डेयरी किसानों को बेहतर मुनाफा भी मिलता है।
