हरियाणा के शिक्षकों और कर्मचारियों को अब नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर, सरकार ने लागू की नई व्यवस्था
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को अब एसीपी, मेडिकल बिल, चाइल्ड केयर लीव और एनओसी जैसे सर्विस मामलों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शिक्षकों व कर्मचारियों के हित में स्कूल शिक्षा विभाग ने पारदर्शी व्यवस्था लागू करते हुए हर स्तर पर फाइल निपटाने के लिए 7 दिन की समयसीमा तय कर दी है। इसका उद्देश्य शिक्षकों का समय बचाना है, ताकि वे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकें।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल स्तर पर दस्तावेजों की जांच के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। इसलिए आगे की प्रक्रिया में प्रस्तुत जानकारी को प्रमाणित माना जाएगा। यदि बाद में कोई जानकारी गलत या फर्जी पाई जाती है तो संबंधित कर्मचारी के साथ-साथ जांच में लापरवाही बरतने वाले स्कूल प्रमुख, बीईओ और डीईओ/डीईईओ पर भी कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था से सर्विस मामलों में देरी और अनावश्यक भागदौड़ पर रोक लगेगी।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था
स्कूल स्तर (7 दिन) : कर्मचारी अपना आवेदन स्कूल कार्यालय में जमा करेगा, जहां तुरंत डायरी नंबर देना अनिवार्य होगा। 7 दिन में फाइल आगे नहीं बढ़ी तो शिक्षक सीधे बीईओ कार्यालय में आवेदन भेज सकता है। आवेदन जमा करने में आनाकानी होने पर स्कूल की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भी आवेदन भेजने की छूट होगी।
ब्लॉक और जिला स्तर (7-7 दिन) : बीईओ कार्यालय को 7 दिन में कार्रवाई करनी होगी। ऐसा न होने पर फाइल डीईओ या डीईईओ के पास जाएगी, जिन्हें भी 7 दिन में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
मुख्यालय स्तर (7 से 30 दिन):यदि तीनों निचले स्तरों पर तय समय में काम नहीं होता है, तो शिक्षक सीधे प्रमाण के साथ मुख्यालय को आवेदन भेज सकता है, जहां मामले की प्रकृति के आधार पर 7 से 30 दिन में अंतिम फैसला होगा।
