मूल उद्धेश्य मानवीय भावों को पेदा करना
उन्होने कहा कि अणुव्रत स्थापना के मूल उद्धेश्य मानवीय भावों को पेदा करना, हर इंसान के दिल मे नैतिकता कि भावना पैदा करना तथा सांप्रदायिक सौहार्द स्थापित करना रहा हे। यदि सांप्रदायिक सौहार्द स्थाप

मानवता ही मानव को उच्च शिखर तक पहुचा सकती हे, उक्त विचार प्रमुख शिक्षाविद डॉ रंग लाल धाकड़ द्वारा 68 वे अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर विज्ञान समिति मे आयोजित अणुव्रत संगोष्ठी मे व्यक्त किए।
उन्होने कहा कि अणुव्रत स्थापना के मूल उद्धेश्य मानवीय भावों को पेदा करना, हर इंसान के दिल मे नैतिकता कि भावना पैदा करना तथा सांप्रदायिक सौहार्द स्थापित करना रहा हे। यदि सांप्रदायिक सौहार्द स्थापित हो जाता हे तो सारे विश्व मे जात-पांत के आधार पर होने वाले झगड़े समाप्त हो जायंगे तथा मानवता अपने आप आ जायगी व मानवता आ जायगी तो मूल्यों व संस्कारों का निर्माण हो जायगा।
आचार्य श्री तुलसी चाहते थे कि भोतिक प्रगति के साथ साथ आध्यात्मिक प्रगति भी बढ़े। कार्यक्रम मे अणुव्रत समिति के नए सदस्य डॉ हरीश माथुर, के एस नलवाया, सरदार रवीद्र पाल सिंह कप्पू, भरत सोनी व प्रकाश तातेड़, अणुव्रत सेवी सम्मान प्राप्त बाल मुकुन्द सनाढ्य तथा अणुव्रत महासमिति के नवनियुक्त प्रतिनिधि उषा चोहान का उपरना, माला तथा अणुव्रत पट्टिका के साथ सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के संजोयक अरुण कोठारी ने वर्ष 2016-17 मे अणुव्रत समिति द्वारा किए गए कार्यों का विवरण पेश किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्बीर के मुश्तफा द्वारा कि गई । संगोष्ठी मे अणुव्रत समिति के सरक्षक गणेश डागलिया ने अणुव्रत के संबंध मे अपने विचार व्यक्त किए । कार्यक्रम मे समिति के 24 सदस्यों ने परिवार के साथ भाग लिया । अणुव्रत समिति के मंत्री निर्मल कुणावत ने धन्यवाद पेश किया, संचालन सहमन्त्री राजेंद्र सेन ने किया ।
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