बुलेट ट्रेन की तरह सुपरफास्ट दौड़ेगी बस, ये नया मॉडल बदलेगा पूरी दुनिया की तस्वीर
Udaipur Times, California Bullet Bus : भारत में जहां ओर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका से आया एक नया आइडिया पूरी दुनिया के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में चर्चा का विषय बन गया है। यह आइडिया है हाई-स्पीड बसों का, जो भविष्य में रेल आधारित बुलेट ट्रेन की एक सस्ती और बेहतरीन विकल्प बन सकती हैं।
कैलिफोर्निया में परिवहन विभाग ऐसी बसों की संभावना पर काम कर रहा है, जो सामान्य बसों जैसी दिखेंगी लेकिन उनकी रफ्तार 100 से 140 मील प्रति घंटा यानी करीब 160 से 225 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है।
क्या है पूरा प्लान?
इस प्रस्ताव के मुताबिक इन बसों को अलग हाई-स्पीड लेन पर चलाया जाएगा ताकि तेज रफ्तार के बावजूद सुरक्षा बनी रहे। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो सैन फ्रांसिस्को और लॉस एंजिल्स के बीच का सफर सिर्फ 3 से 4 घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जबकि अभी इसमें काफी ज्यादा समय लगता है।
अगर इसी तरह की तकनीक भारत में लागू होती है, तो लंबी दूरी की यात्रा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली से बिहार जैसे रूट पर यात्रा का समय घटकर लगभग 5 घंटे तक आ सकता है।
क्या होगी इस बस की खासियत?
इतनी ज्यादा स्पीड पर चलने के लिए बसों को पूरी तरह नए डिजाइन में तैयार करना होगा। इनमें शामिल होंगे:
हाई-स्पीड टायर
एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम
मजबूत लेकिन हल्की बॉडी
एयरोडायनामिक डिजाइन
कुछ प्रोटोटाइप इलेक्ट्रिक बसों के रूप में सामने भी आ चुके हैं, जिनका आकार पारंपरिक बसों से काफी अलग है ताकि हवा का दबाव कम किया जा सके।
सबसे बड़ी चुनौती सड़कों की
सबसे बड़ी चुनौती सड़कों की है। मौजूदा हाईवे इतनी तेज रफ्तार के लिए डिजाइन नहीं हैं। इसके लिए सड़क संरचना, मोड़, लेन डिजाइन और सतह की क्वालिटी में बड़े बदलाव करने होंगे। इसी वजह से विशेषज्ञ जर्मनी के ऑटोबान जैसे मॉडल का उदाहरण दे रहे हैं, जहां हाई-स्पीड ड्राइविंग के लिए विशेष व्यवस्था होती है।
बुलेट ट्रेन बनाम हाई-स्पीड बस
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में भारी निवेश और रेल ट्रैक की जरूरत होती है, जबकि बस आधारित मॉडल अपेक्षाकृत सस्ता माना जा रहा है क्योंकि इसमें अलग ट्रैक बनाने की जरूरत नहीं होती। यही कारण है कि इस आइडिया को आर्थिक और तकनीकी दोनों नजरिए से बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
छोटे शहरों को भी फायदा
हाई-स्पीड बस नेटवर्क का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यह रेल नेटवर्क की तुलना में ज्यादा लचीला होगा। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है इसके साथ ही इलेक्ट्रिक तकनीक के इस्तेमाल से प्रदूषण कम करने और ईंधन लागत घटाने में भी मदद मिल सकती है।
अभी कहां तक पहुंचा है प्रोजेक्ट?
फिलहाल यह योजना शुरुआती अध्ययन और व्यवहार्यता जांच के स्तर पर है। अभी इसे किसी तरह की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। आने वाले वर्षों में तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन के बाद ही आगे फैसला लिया जाएगा।
अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो यह मॉडल सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई देश इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
